चंडीगढ़ में हर गली-मोहल्ले में पहुंचा रावण के पुतले का दहन; बाजार में बिक रहे दस फुट तक के पुतले
चंडीगढ़ में दशहरा पर रावण दहन का चलन अब घरों और गली-मोहल्लों तक फैल गया है, जहां एक से दस ...और पढ़ें

बच्चों को आकर्षित करने के लिए पुतलों की मांग बढ़ रही है।
HighLights
रावण दहन अब घरों और गली-मोहल्लों तक पहुंचा।
बाजार में एक से दस फुट के छोटे पुतले उपलब्ध।
भीड़ से बचने के लिए घर पर दहन का चलन।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। दशहरा पर बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन अब केवल बड़े मैदानों और सार्वजनिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहा। बदलते चलन के बीच रावण दहन की परंपरा अब घरों और गली-मोहल्लों तक पहुंचने लगी है।
बाजार में एक फुट से लेकर दस फुट तक के छोटे रावण के पुतले खूब बिक रहे हैं। खासतौर पर बच्चों को आकर्षित करने के लिए तैयार किए गए इन पुतलों की मांग बढ़ रही है।
चंडीगढ़ के सेक्टर-22 और पंचकूला में सेक्टर-17-18 राउंडअबाउट सहित कई जगहों पर छोटे-बड़े रावण के पुतले बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इनकी कीमत एक हजार से दस हजार रुपये तक है।
छोटे आकार के होने के बावजूद इन पुतलों को बड़े रावण की तरह तैयार किया गया है। रंग-बिरंगी पोशाक, बड़ी मूंछें, आकर्षक वेशभूषा और चेहरे के हाव-भाव इन्हें खास बनाते हैं। कुछ पुतलों में पटाखे भी लगाए गए हैं, जिससे बच्चों के बीच इनका आकर्षण और बढ़ जाता है।
भीड़ से बचने के लिए घर पर ही दहन
दशहरा मेलों और बड़े आयोजनों में उमड़ने वाली भीड़ के कारण कई अभिभावक बच्चों को लेकर जाने से बचते हैं। ऐसे में छोटे रावण खरीदकर घर या आसपास की खाली जगह पर दहन करने का चलन बढ़ रहा है।
कई जगह गली-मोहल्लों के लोग भी आपस में पैसे इकट्ठे कर पुतले खरीदते हैं और बच्चों के साथ मिलकर दशहरा मनाते हैं। इससे बच्चों को त्योहार की परंपरा से जोड़ने के साथ ही सामूहिक आयोजन का अवसर भी मिलता है।
छोटे पुतलों के साथ सुरक्षा भी जरूरी
हालांकि, पटाखों से लैस छोटे पुतलों का दहन करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। इन्हें घरों, वाहनों, दुकानों और बिजली की तारों से दूर खुली जगह पर ही जलाना चाहिए।
बच्चों को पटाखों के पास अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और दहन के दौरान बड़ों की निगरानी जरूरी है। छोटे आकार के रावण अब त्योहार को घरों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उत्सव के साथ सुरक्षा भी उतनी ही अहम है।
