चंडीगढ़ में Doctor kidnapping केस: जांच से कैसे गायब हुए पुलिसकर्मियों के नाम? कोर्ट ने मंगवाई CBI की गुप्त फाइलें
चंडीगढ़ के डॉक्टर मोहित धवन अपहरण मामले में सीबीआई की जांच पर सवाल उठे हैं। कोर्ट ने सीबीआई को अपनी ...और पढ़ें

डाॅक्टर मोहित धवन के अपहरण मामले में सीबीआई की जांच सवालों के घेरे में। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
कोर्ट के बाहर से किया था डाॅक्टर का अपहरण।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच।
चार साल पुराने मामले की जांच पर उठ रहे सवाल।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शहर के नामी डेंटिस्ट डाॅक्टर मोहित धवन के अपहरण मामले में सीबीआई की जांच सवालों के घेरे में आ गई है। चार साल पुराने इस हाईप्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों समेत नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया था।
इस मामले में सीबीआई की स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है, जिससे जांच एजेंसी की अब तक की पूरी पड़ताल की परतें खुल सकती हैं। सीबीआई को इस मामले में अपनी गोपनीय जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश करनी होगी।
सीबीआई के एफआईआर दर्ज करने से लेकर चार्जशीट दाखिल करने तक की पूरी कार्रवाई इस रिपोर्ट में शामिल होगी। खास बात यह है कि इस रिपोर्ट को न तो शिकायतकर्ता देख सकेगा और न ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
इसे केवल जज अपने चैंबर में बैठकर देखेंगी। स्पेशल मजिस्ट्रेट नीलम ने डाॅ. मोहित धवन की याचिका पर यह आदेश दिया है। डाॅ. धवन का आरोप है कि सीबीआई ने जानबूझकर केस से कुछ आरोपित पुलिसकर्मियों के नाम गायब कर दिए।
अदालत ने माना कि मामले में जांच से जुड़ी कई गंभीर विसंगतियां और ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनकी पड़ताल के लिए सीबीआई की आंतरिक रिपोर्ट देखना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल गोपनीयता का हवाला देकर सीबीआइ इस रिपोर्ट को अदालत के सामने पेश करने से नहीं बच सकती।
इसलिए मंगवाई गई गुप्त फाइलें
असल में डाॅ. धवन ने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की। सीबीआई ने चार्जशीट में खुद बताया था कि आरोपित पुलिसकर्मियों ने डाॅक्टर का अपहरण करने की साजिश एक व्हाट्सएप ग्रुप में रची थी।
उस ग्रुप में 15 पुलिसकर्मी थे, लेकिन सीबीआई ने केवल नौ को ही आरोपित बनाया। धवन ने सवाल उठाया कि आखिर सीबीआई ने किस आधार पर यह तय किया कि किन पुलिसकर्मियों की अपहरण में भूमिका थी और किनकी नहीं थी।
यह है मामला
मामले की शुरुआत सात जनवरी 2022 को हुई थी। आरोप है कि चंडीगढ़ जिला अदालत सेक्टर-43 के गेट के पास क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मियों ने डाॅ. मोहित धवन को जबरन उठाया था। आरोपों के मुताबिक, उन्हें एक आई-20 कार में बैठाकर ले जाया गया।
बाद में पुलिस रिकाॅर्ड में उनकी गिरफ्तारी आईएसबीटी सेक्टर-43 के पीछे शाम 6:32 बजे दिखाई गई। इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों, सब इंस्पेक्टर सुरेश कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी।
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