ग्रीन पटाखों का धुआं भी जहरीला, 2 घंटे की आतिशबाजी बिगाड़ सकती है चंडीगढ़ की हवा; प्रदूषण का खतरा बरकरार
चंडीगढ़ में दीवाली पर केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की अनुमति है, लेकिन ये भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं होते। ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में दीवाली पर केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
दीवाली पर केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति।
ग्रीन पटाखे पारंपरिक से कम, पर फिर भी करते हैं प्रदूषण।
विशेषज्ञ बोले-ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। दीवाली की रात आसमान रोशन करने के लिए जलाए जाने वाले पटाखे कुछ ही घंटों में शहर की हवा की सेहत बिगाड़ सकते हैं। इस बार चंडीगढ़ प्रशासन ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल नीरी से प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी है।
हालांकि, ग्रीन पटाखों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त मानना गलत होगा। इनसे पारंपरिक पटाखों के मुकाबले प्रदूषक तत्व कम निकलते हैं, लेकिन धुआं, बारीक कण और हानिकारक गैसें फिर भी हवा में घुलती हैं। ऐसे में दो घंटे की आतिशबाजी भी बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।
पीजीआई के प्रो. डाॅ. सोनू गोयल के अनुसार, सीएसआइआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने प्रदूषण कम करने के लिए स्वास, स्टार और सफल जैसी ग्रीन पटाखों की श्रेणियां विकसित की हैं। निर्धारित मानकों के अनुसार इनसे पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम से कम 30 प्रतिशत तक कम पार्टिकुलेट मैटर निकलूना चाहिए।
कुछ श्रेणियों में सल्फर डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड जैसी गैसों के उत्सर्जन में भी कमी का मानक तय है। लेकिन यह कमी एक पटाखे के उत्सर्जन से जुड़ी है, पूरे शहर के प्रदूषण से नहीं। बड़ी संख्या में पटाखे एक साथ जलने पर प्रदूषण फिर भी बढ़ सकता है।
दीवाली पर पीएम2.5 का स्तर 16 गुना तक पहुंचने का अध्ययन में दावा
2023 में जर्नल एनवायरनमेंटल पाल्यूशन में प्रकाशित शोध में ग्रीन पटाखों से निकलने वाले पीएम10 और पीएम 2.5 कणों में बेरियम की मात्रा पारंपरिक पटाखों के मुकाबले 30 से 60 प्रतिशत तक कम पाई गई।
वहीं, दिल्ली में वर्ष 2022 के दौरान दिवाली पर हुए अध्ययन में आतिशबाजी के समय पीएम2.5 का स्तर सामान्य दिनों की तुलना में करीब 16 गुना तक पहुंच गया था। अमृतसर में भी दीवाली 2022 पर पीएम2.5 का स्तर 182 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जबकि 24 घंटे का निर्धारित मानक 60 माइक्रोग्राम है।
पिछले साल दो घंटे में कई इलाकों का एक्यूआई 300 पार
डाॅ. सोनू गोयल ने कहा कि दीवाली 2025 के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। 20 अक्टूबर को रात आठ बजे के बाद सेक्टर-53 में एक्यूआई 304, सेक्टर-39 स्थित इमटेक में 318 और सेक्टर-12 स्थित पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज में 312 दर्ज किया गया था।
ये सभी स्तर बहुत खराब श्रेणी में थे। सेक्टर-22 में एक्यूआइ 234 और सेक्टर-25 में 296 रहा। अगले दिन सुबह तक हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ था। इससे पता चलता है कि आतिशबाजी के दौरान कुछ घंटों में प्रदूषण तेजी से बढ़ सकता है।
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