चंडीगढ़ प्रशासन में डेपुटेशन कर्मियों के वेतन की जांच, राष्ट्रपति कार्यालय के बाद गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट
चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर नियुक्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया की जांच गृह मंत्रालय ...और पढ़ें
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पंजाब-हरियाणा के 60:40 रेश्यो पर उठे सवाल।
HighLights
गृह मंत्रालय ने चंडीगढ़ डेपुटेशन कर्मियों के वेतन जांच के निर्देश दिए
राष्ट्रपति कार्यालय ने भी पहले ऑडिट के लिए निर्देश जारी किए थे
शिक्षक यूनियन ने डेपुटेशन से स्थानीय भर्ती प्रभावित होने का आरोप लगाया
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर नियुक्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया अब जांच के घेरे में है। गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद को शिकायत भेजकर डेपुटेशन पर कार्यरत कर्मचारियों, शिक्षकों और प्रिंसिपलों को वेतन दिए जाने की प्रक्रिया की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से भी डेपुटेशन पर नियुक्त कर्मचारियों से जुड़े मामले में ऑडिट के निर्देश दिए जा चुके हैं। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स (जेएसी) की ओर से डेपुटेशन व्यवस्था और वेतन भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भारत सरकार तथा ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया के समक्ष शिकायत की गई थी।
यूनियन का आरोप है कि लंबे समय तक डेपुटेशन पर रहने वाले कर्मचारियों से चंडीगढ़ में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ऑडिटर जनरल से जुड़ी शिकायत पर राष्ट्रपति कार्यालय ने जांच के निर्देश दिए, जबकि भारत सरकार से संबंधित शिकायत दोबारा मुख्य सचिव को मार्क की गई है।
डेपुटेशन को पनाह देने के लिए कॉन्ट्रैक्ट और गेस्ट फैकल्टी से भेदभाव का आरोप
शिकायतकर्ता शिक्षक यूनियन के सचिव शिव मूर्ति ने आरोप लगाया कि पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर कर्मचारियों को चंडीगढ़ में बनाए रखने के लिए स्कूल-कॉलेजों में कार्यरत कॉन्ट्रैक्ट और गेस्ट फैकल्टी के साथ भेदभाव किया जाता है।
उनके अनुसार गेस्ट और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के आर्थिक लाभ रोकने, उन पर आरोप लगाने और नौकरी से हटाने तक की शिकायतें सामने आती रही हैं। शिव मूर्ति ने कहा कि अप्रैल 2022 से केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बावजूद डेपुटेशन पर कर्मचारियों को बुलाने की प्रक्रिया जारी है, जबकि चंडीगढ़ में नियमित भर्ती के लिए आवश्यक नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट में तत्कालीन पदों का 60:40 अनुपात
यूनियन के अनुसार पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट, 1966 के समय चंडीगढ़ के तत्कालीन पदों को पंजाब और हरियाणा के कर्मचारियों के लिए 60:40 के अनुपात में बांटा गया था।
वर्ष 1975 से 1987 के बीच केंद्र सरकार ने शहर की बदलती संरचना के अनुसार भर्ती और प्रमोशन के नियम बनाए, लेकिन इनमें 60:40 डेपुटेशन कोटे का उल्लेख नहीं था।
यूनियन का दावा है कि इसके बाद विभिन्न विभागों में 20 से 60 प्रतिशत तक के कोटे तय कर उन्हें पंजाब-हरियाणा के लिए 60:40 अनुपात में बांटा गया।
विशेष रिक्रूटमेंट कमेटी ने तय किए कोटे, वैधता पर उठे सवाल
वर्ष 1987 से 1992 के बीच पंजाब के राज्यपाल, जो चंडीगढ़ के प्रशासक का कार्यभार भी संभालते थे, की ओर से बी और सी श्रेणी की भर्ती के लिए गृह सचिव की अध्यक्षता में विशेष रिक्रूटमेंट कमेटी बनाई गई थी।
यूनियन का आरोप है कि इस कमेटी ने केंद्र से स्वीकृत पदों पर पहले 20 से 40 प्रतिशत तक के कोटे तय किए और बाद में इन्हें पंजाब और हरियाणा के लिए 60:40 अनुपात में बांटा।
यूनियन का कहना है कि इससे चंडीगढ़ के स्थानीय कर्मचारियों की पदोन्नति और नियमित भर्ती प्रभावित हुई।
अब गृह मंत्रालय की ओर से मांगी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना है कि डेपुटेशन पर नियुक्त कर्मचारियों को वेतन भुगतान किस नियम और किस स्वीकृत प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
