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सैनिक की विधवा को 42 साल बाद मिली पेंशन, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हटाई न्यूनतम सेवा शर्त

Published: Fri, 18 Sep 2026 02:23 AM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेना में सात साल सेवा के बाद अमान्य घोषित जवान की विधवा को 42 साल बाद पेंशन का हक दिया।

सेना में सात वर्ष बाद अमान्य घोषित जवान की विधवा को 42 वर्ष बाद पेंशन का रास्ता साफ।

सेना में सात वर्ष बाद अमान्य घोषित जवान की विधवा को 42 वर्ष बाद पेंशन का रास्ता साफ।

HighLights

  1. सैनिक की विधवा को 42 साल बाद मिला पेंशन का अधिकार।

  2. हाई कोर्ट ने 10 साल की न्यूनतम सेवा शर्त को हटाया।

  3. अमान्य सैनिक हाकम सिंह की विधवा बलबीर कौर को पेंशन।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सेना में केवल सात वर्ष सेवा के बाद अमान्य घोषित कर बाहर किए गए जवान की विधवा को 42 साल बाद पेंशन का हक मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर किसी सैनिक को अमान्य पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने 10 साल की न्यूनतम अर्हकारी सेवा (मिनिमम क्वालीफाइंग सर्विस) पूरी नहीं की थी।

कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस आपत्ति को स्वीकार नहीं किया कि सैनिक की सेवा अवधि 10 साल से कम थी और उसकी विधवा ने पेंशन का दावा करने में करीब 42 साल की देरी की।

मामला होशियारपुर निवासी बलबीर कौर और उनके दिवंगत पति हाकम सिंह से जुड़ा है। हाकम सिंह 18 अगस्त, 1971 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। करीब सात वर्ष सेवा के बाद वर्ष 1978 में उन्हें अमान्य घोषित कर सेना से बाहर कर दिया गया।

उस समय उन्हें अमान्य ग्रेच्युटी और मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी का भुगतान किया गया था। बाद में उनकी विधवा ने पति को मिलने वाले पेंशन लाभ का दावा किया, लेकिन केंद्र सरकार ने कहा कि हाकम ने 10 साल की सेवा पूरी नहीं की थी, इसलिए वह पेंशन लाभ के पात्र नहीं थे।

कोर्ट ने कहा कि कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार, अमान्य पेंशन के लिए 10 साल की सेवा पूरी होना अपने आप में ऐसी अनिवार्य बाधा नहीं है, जिसके आधार पर पात्र सैनिक को पेंशन लाभ से वंचित कर दिया जाए।