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दुर्लभ बीमारी से ओमान में छूटी नौकरी, बीमा कंपनी को देने होंगे 18 लाख रुपये; चंडीगढ़ उपभोक्ता फोरम का फैसला

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Sat, 07 Nov 2026 02:01 PM (IST)

चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने दुर्लभ बीमारी के कारण ओमान में नौकरी गंवाने वाले व्यक्ति को बड़ी राहत दी है। ...और पढ़ें

चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला आयोग का फैसला बरकरार रखा।

  2. जीरकपुर की दशमेश काॅलोनी निवासी मनोज कुमार को राहत।

  3. न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस के कारण ओमान में नौकरी छूटने का मामला।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। दुर्लभ बीमारी न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस के कारण ओमान में नौकरी छोड़कर भारत लौटे एक व्यक्ति को बीमा क्लेम के मामले में बड़ी राहत मिली है। चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता को 18 लाख रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने भी यही फैसला सुनाया था, लेकिन कंपनी ने उस आदेश को राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दे दी थी। अब राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 20 हजार रुपये मुआवजा व कानूनी खर्च देने का आदेश भी कायम रखा है।

आयोग ने जीरकपुर की दशमेश काॅलोनी निवासी मनोज कुमार की शिकायत पर आईसीआईसीआई लोंबार्ड कंपनी के खिलाफ यह फैसला सुनाया है। केस के अनुसार, मनोज ने मार्च 2018 में अपने होम लोन से जुड़ी पांच साल की बीमा पालिसी ली थी। इसके लिए उसने करीब 1.37 लाख रुपये प्रीमियम जमा करवाया था।

उसका कहना था कि पालिसी लेते समय उसे बताया गया था कि बीमारी, दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में होम लोन की बकाया राशि चुकाने के लिए बीमा सुरक्षा मिलेगी। बाद में उसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नामक दुर्लभ बीमारी हो गई, जिसके कारण वह ओमान में काम करने में असमर्थ हो गया और उसे नौकरी छोड़कर भारत लौटना पड़ा।

उसने बीमा कंपनी के पास क्लेम के लिए आवेदन दिया, लेकिन कंपनी ने उसका दावा खारिज कर दिया। इसके बाद उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। जिला आयोग ने बीमा कंपनी को 18 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था।

साथ ही चार जून 2019 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 20 हजार रुपये मुआवजा व कानूनी खर्च देने के भी निर्देश दिए थे। बीमा कंपनी ने इस फैसले को राज्य आयोग में चुनौती दी। कंपनी का तर्क था कि जिला आयोग ने पाॅलिसी की शर्तों से परे जाकर यह फैसला सुनाया था। हालांकि, राज्य आयोग ने उसकी दलीलों को नहीं माना।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसके अनुसार बीमा कंपनी को उन शर्तों की जानकारी पालिसी धारक तक पहुंचाने का प्रमाण देना जरूरी है, जिनके आधार पर वह क्लेम खारिज कर रही है। इसी आधार पर राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।

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