जेएनएन, चंडीगढ़। स्मार्ट सिटी के STP प्रोजेक्ट के टेंडर में स्मार्ट गेम की शिकायत PMO और CVC को की गई है। Smart City Project में चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसी शर्तें टेंडर में शामिल की गई जिससे अधिकांश कंपनियां दौड़ से बाहर हो जाए। सीवीसी और पीएमओ को भेजी गई शिकायत में चुनिंदा कंपनियों को फेवर करने की बात कही गई है। इसके साथ ही इस टेंडरों को रिजेक्ट कर नए सिरे से टेंडर फ्लोट करने की मांग की है ताकि अधिक से अधिक कंपनियां इसमें भाग ले सकें। टेंडर की शर्तों में गड़बड़ी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिन कंपनियों को दौड़ से बाहर किया गया, वह देश की नामी हैं। यह कंपनियां देश की लगभग हर प्रमुख स्मार्ट सिटी में एसटीपी प्लांट लगा चुकी हैं। इन कंपनियों ने पहले ही शक जाहिर कर दिया था कि एसटीपी के टेंडर में कुछ कंपनियों को फेवर किया जा रहा है।

109 एमएलडी का प्लांट 440 करोड़ में कैसे
STP प्रोजेक्ट का टेंडर भरने की दौड़ से बाहर कंपनियों का आरोप है कि देश में कहीं भी 109 एमएलडी के प्लांट में 440 करोड़ रुपये की लागत नहीं आई है फिर चाहे इसमें सिविल वर्क, सीवरेज लाइन बिछाने का काम और 15 साल की मेंटेनेंस और ऑपरेशनल लागत क्यों न शामिल हो। हाल ही फरीदाबाद में 130 एमएलडी के एसटीपी प्लांट का टेंडर हुआ। इस प्लांट की लागत पांच साल की मेंटेनेंस और ऑपरेशनल लागत सहित 290 करोड़ रही।

औरंगाबाद में 464 करोड़ में लगे प्लांट्स
औरंगाबाद में खिलारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने 464 करोड़ रुपये में न केवल 161 एमएलडी, 35 एमएलडी तथा 10 एमएलडी के प्लांट्स लगाए बल्कि 218 किलोमीटर की सीवरेज लाइन बिछाई। इसके बावजूद कंपनी को चंडीगढ़ में टेंडर में भाग लेने के योग्य नहीं समझा गया।

तीनों बार एलएंडटी ने भरा टेंडर
स्मार्ट सिटी के एसटीपी प्रोजेक्ट में सिर्फ एलएंडटी ऐसी कंपनी है जिसने तीनों बार टेंडर भरा। इसके अतिरिक्त सिर्फ वाटेक ही तीसरी बार बिड करने में सक्षम रही।

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Posted By: Vikas Kumar

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