चंडीगढ़ [राजेश ढल्ल]। अध्यक्ष बनने के बाद अरुण सूद ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां और ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रमों में भाग लेने की सक्रियता बढ़ाई हुई है लेकिन इसके साथ ही पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन की सक्रियता कम नहीं हुई है। अधिकतर कार्यक्रमों में सूद और टंडन की जोड़ी एक साथ मौजूद रहती है। आयोजक भी सूद के साथ टंडन को अतिथि के तौर पर बुला रहे हैं। सूद खुद भी आयोजकों को कह देते हैं कि टंडन को भी आमंत्रित किया जाए। ऐसे कार्यक्रमों में सूद टंडन की जमकर तारीफ करते हैं। ऐसे में उनके विरोधी यह भी कह रहे है कि सूद टंडन को शहर की भविष्य की राजनीति में और मजबूत कर रहे हैं। करे भी क्यों नहीं। सूद को अध्यक्ष बनाने में टंडन ने अहम भूमिका निभाई है। सूद टंडन की राय लेकर ही पार्टी के अहम फैसले लेते हैं। टंडन का शहर से सांसद बनने का भी सपना है।

लग्जरी गाड़ियों वाले हो गए ऑटो में सवार

लग्जरी कारों से चलने वाले व्यापारी अगर कभी ऑटो में चलते दिखाई दे तो हर कोई हैरान हो जाता है। व्यापार मंडल के चेयरमैन एवं मनोनीत पार्षद चरणजीव सिंह और अध्यक्ष अनिल वोहरा अभी हाल ही में ऑटो में बैठकर जाते दिखे। यहां दोनों निगम में हाल ही में व्यापारियों के साथ अधिकारियों को मिलने आए थे। यहां पर यह दोनों किसी अन्य व्यापारी की कार में आ गए लेकिन वापस जाते समय उनको कार नहीं मिली तो इंतजार किए बिना थ्री व्हीलर रुकवाया और बैठकर निकल गए। कई साल बाद ऑटो में बैठे थे। उस समय एक व्यापारी नेता ने ऑफर भी किया कि उनकी कार ले जाएं। असल में इन दोनों व्यापारी नेताओं को लगा कि अगर किसी और की गाड़ी लेकर चले गए तो फिर से वापस छुड़वाना पड़ेगा। क्यों झंझट में पड़ें। इसलिए ऑटो ही ठीक रहेगा।

अभूतपूर्व मेयर कहें साहब

राजेश कालिया को मेयर पद से हटे हुए अभी सवा माह ही हुए हैं लेकिन उनके समर्थक और करीबी उनकी ब्रां¨डग भूत नहीं अभूतपूर्व मेयर कहकर कर रहे हैं। असल में हुआ यूं कि एक रेजिडेंट्स मेयर राजबाला मलिक को मिलकर जा रहा था तो उनका टकराव कालिया और उनके दोस्त गौतम मितल से हो गया। मितल कालिया के मेयर रहने हुए राजनीतिक सलाहकार भी थे। निगम की पार्किग में उस रेजिडेंट्स की मुलाकात कालिया से हुई। रेजिडेंट्स ने कहा कि अब तो आप भूतपूर्व मेयर हो लेकिन हमारे लिए आप हमेशा मेयर ही रहोगे। ऐसे में गौतम मितल ने तुरंत जवाब दिया कि भूतपूर्व नहीं कालिया जी तो अभूतपूर्व मेयर थे। उनके दरवाजे हमेशा लोगों के लिए खुले रहते थे। कालिया मेयर रहते हुए प्रोटोकॉल की परवाह नहीं करते थे। किसी भी अधिकारी के कमरे में जाकर गपशप करने लग जाते थे।

कमरे के लिए भटक रहे एसई

प्रशासन में वापस गए सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर संजय अरोड़ा को निगम ने वापस बुला लिया लेकिन तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी उनका कमरा तय नहीं कर पाए। जबकि नगर निगम अरोड़ा से पूरा काम करवा रहा है। अरोड़ा नगर निगम में आते हैं और कभी किसी कमरे में तो कभी किसी दूसरे कमरे में बैठकर फाइल निपटाकर चले जाते हैं। जबकि नगर निगम ने उनसे सरकारी गाड़ी, कंप्यूटर और लैपटॉप तक वापस ले लिया है। तीन सप्ताह पहले संजय अरोड़ा को प्रशासन का एसई का चार्ज मिल गया था। उनके वापस जाते ही कमरा अतिरिक्त कमिश्नर तिलक राज को दे दिया गया लेकिन एक दिन बाद ही नगर निगम कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद संजय अरोड़ा को नगर निगम के एसई का भी चार्ज मिल गया लेकिन उनका कमरा हाथ से गया। ऐसे में इस समय संजय अरोड़ा काम करने के लिए इधर-उधर अलग-अलग कमरों में भटक रहे हैं। 

Posted By: Vikas Kumar

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!