चंडीगढ़ की पूर्व SDM शिल्पी के पति की हाॅफ पैंट से मिला था नोटों का पैकेट, CBI कोर्ट से डिस्चार्ज अर्जी खारिज
सीबीआई कोर्ट ने चंडीगढ़ की पूर्व एसडीएम शिल्पी पात्तर के पति धीरज दत्त की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी है। ...और पढ़ें

नौ साल पुराने रिश्वत मामले की सीबीआई कोर्ट में सुनवाई। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
नौ साल पुराना रिश्वत मामला।
धीरज पर चलेगा मुकदमा।
धीरज ने रिश्वत की छिपाई थी।
रवि अटवाल, चंडीगढ़। नौ साल पुराने रिश्वत मामले में चंडीगढ़ की पूर्व एसडीएम व एचसीएस अधिकारी शिल्पी पात्तर के पति धीरज दत्त को सीबीआई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सीबीआई कोर्ट ने धीरज की डिस्चार्ज अर्जी रद कर दी। अब पत्नी के साथ-साथ धीरज पर भी मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।
दो महीने पहले धीरज ने खुद को बेकसूर बताते हुए कोर्ट में डिस्चार्ज यानी आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दायर की थी। इसका विरोध करते हुए सीबीआई के सरकारी वकील नरेंद्र सिंह ने कोर्ट को कहा कि धीरज की इस केस में अहम भूमिका है। धीरज और उसकी पत्नी शिल्पी ने मिलकर रिश्वत का खेल खेला था।
जब सीबीआई ने उनके घर पर छापा मारा तो धीरज ने रिश्वत की रकम अपनी हाफ पैंट में छिपा दी थी। जब सीबीआई ने तलाशी ली तो 50 हजार रुपये से भरे नोटों का पैकेट बरामद हो गया था। जब सीबीआई ने इन नोटों के बारे में पूछा था तो उसने हंसते हुए कहा कि ''मैं तो लक्ष्मी की पूजा कर रहा था, माता की मेहरबानी हो गई।
सीबीआई के वकील नरेंद्र सिंह ने कहा कि आरोपित के इस बयान से पति-पत्नी की मिलीभगत का पता चलता है। हालांकि धीरज के वकील ने कहा कि उनका इस केस से कोई संबंध नहीं है। धीरज ने मौके पर जो हाफ पेंट पहनी थी, सीबीआई ने उसे कब्जे में नहीं लिया था। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को नहीं माना।
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2017 में 50 हजार रुपये लेते पकड़ी गई थी शिल्पी
यह मामला अगस्त 2017 का है। सीबीआई ने एक व्यापारी तरसेम कुमार की शिकायत पर केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता का अपने भाई के साथ सेक्टर-26 की ग्रेन मार्केट स्थित एक संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था।
आरोप था कि तत्कालीन एसडीएम शिल्पी पात्तर ने संपत्ति सील करने के आदेश जारी कर दिए थे। इसी केस में तरसेम को राहत देने के बदले 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। सीबीआई ने फिर जाल बिछाकर शिल्पी, उसके पति धीरज और एक बिचौलिए जीएस बराड़ को गिरफ्तार कर लिया था।
कई साल तक हाईकोर्ट में अटका था मामला
नौ साल पुराना यह केस कई साल तक हाईकोर्ट में अटका हुआ था। शिल्पी पात्तर ने उसके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी को लेकर एक याचिका दायर की थी। इस याचिका के कारण हाईकोर्ट ने मुकदमे पर रोक लगा दी थी, लेकिन इसी साल यह याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी, जिसके बाद मामला सीबीआई कोर्ट में फिर से शुरू हो गया है।
