जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : हेल्थ मिनिस्ट्री ने पीजीआइ को चिट्ठी लिख पीजीआइ इप्लाइज यूनियन को पिछले चार साल में दिया हुआ करीब 15 करोड़ रुपये का बोनस रिकवर करने के लिए चिट्ठी लिखी है। यूनियन में करीब छह हजार कर्मचारी है। वहीं, पीजीआइ इंप्लाइज यूनियन (नॉन फैकल्टी) और पीजीआइ टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन के करीब 2700 कर्मचारियों ने इसके खिलाफ कैट (केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण) का दरवाजा खटखटाया है। कैट ने इस पर अब पीजीआइ, सेंट्रल फाइनेंस मिनिस्ट्री और हेल्थ मिनिस्ट्री को नोटिस जारी कर अलगे दो हफ्तों तक जवाब दायर करने के लिए कहा है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 29 नंवबर तक रिकवरी पर स्टे लगा दी है। चार साल से नहीं आई है कोई चिट्ठी

यूनियन के प्रधान अश्वनी कुमार मुंजाल ने बताया कि वर्ष 1967 से एम्स और पीजीआइ में ऑटोनॉमस बॉडी को सेंट्रल फाइनेंस मिनिस्ट्री द्वारा बोनस दिया जा रहा है। लेकिन अब पीजीआइ डायरेक्टर को एक चिट्ठी में हेल्थ मिनिस्ट्री ने लिखा है कि पिछले चार साल से पीजीआइ की ऑटोनॉमस बॉडी वर्करों को बोनस देने के लिए कोई चिट्ठी उनके पास नहीं आई है। इसलिए वर्ष 2016 से लेकर अभी तक जो भी बोनस दिया गया है, उसकी कर्मचारियों से रिकवरी की जाए। अश्वनी का कहना है कि वर्ष 2002 से पहले उनकों ऐसी कोई चिट्ठी नहीं आई थी, इसलिए लगातार उनको बोनस मिल रहा था। लेकिन 2002 में मिनिस्ट्री द्वारा बोनस दिए जाने के लिए कुछ कंडीशन लगा दी गई जिसको यूनियन ने पूरा कर दिया और तब से फिर बोनस मिलता रहा। लेकिन अब मिनिस्ट्री द्वारा फिर से यह कहा गया कि ऑटोनॉमस बॉडी की तरफ से वर्ष 2015 से बोनस के लिए कोई चिट्ठी नहीं आई है। इसलिए इनसे रिकवरी की जाए। बार-बार चिट्ठी लिखने की जरूरत क्यों

वहीं, अश्वनी कहना है कि जब हमने एक बार सभी नियमों को एक बार अपना लिया तो फिर बार-बार चिट्ठी लिखने की क्या जरूरत है। इसके लिए छह सितंबर को गवर्निग बॉडी (हेल्थ मिनिस्ट्री) को चिट्ठी भी लिखी गई। लेकिन गर्वनिग बॉडी ने कहा कि इसकी क्लेरिफिकेशन फाइनेंस मिनिस्ट्री से लें। इसके बाद 21 अक्टूबर, 2019 को उनको इस साल का भी बोनस मिल गया। लेकिन 29 अक्टूबर को रिकवरी के लिए फिर से चिट्ठी आ गई। अब इसके खिलाफ कैट में याचिका दायर की है।

Posted By: Jagran

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