राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। Punjab Cabinet Meeting: पंजाब कांग्रेस में घमासान और फिर लेटर बम के सामने आने के बीच आज पंजाब कैबिनेट की बैठक होने जा रही है। खुलासा हुआ था कि कांग्रेस के 40 विधायकोें ने कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ पार्टी हाई कमान को पत्र लिखा था। उसके बाद इस बैठक को महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में सबकी निगाहें चार बागी मंत्रियों पर होंगी। इन मंत्रियों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रकट किया था। वर्चुअल होने वाली कैबिनेट बैठकों का इन मंत्रियों ने विरोध भी किया था। इसे देखते हुए चर्चा है कि कल होने वाली बैठक में बागी मंत्रियों के शामिल होने की संभावना कम है।

बता दें कि कैबिनेट बैठक से दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रति अविश्वास प्रकट करने वाले कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने के लिए करीब 40 विधायकों द्वारा हस्ताक्षर करवाए हुए एक पत्र अस्तित्व में आया। यह पत्र पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को संबोधित है। इस पत्र को प्रदेश के प्रभारी हरीश रावत को भी नहीं भेजा गया है। हालांकि सुखजिंदर सिंह रंधावा ने ऐसे किसी पत्र को लिखे जाने से इन्‍कार किया है।

तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज कैबिनेट बैठक बुलाई है। यह बैठक पूर्व की तरह ही वर्चुअल होनी है। वर्चुअल कैबिनेट बैठकों को लेकर मंत्री आपत्ति आ रहे है। मंत्रियों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री अन्य समारोहों में जा सकते है तो फिर कैबिनेट बैठक वर्चुअल क्यों की जाती है। ऐसे में माना जा रहा है कि कल की कैबिनेट बैठक में कैप्टन का विरोध कर रहे मंत्री शामिल नहीं होंगे।

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लोगों ही नहीं, कैप्टन से कांग्रेसी विधायकों का भरोसा भी खत्म: चीमा

कांग्रेस के 40 विधायकों द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री के पद से हटाने की मांग के आधार पर आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह से सदन में बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य सरकार अल्पमत में है और समय की मांग है कि फ्लोर टेस्ट कराया जाए। कहा कि कैप्टन पंजाब के लोगों समेत कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के विधायकों का समर्थन खो चुके हैं।

चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कार्यशैली और कुर्सी की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी दो धड़ों में बंट गई है। कैप्टन कांग्रेस के अधिकांश विधायकों का भरोसा खो चुके हैं। नतीजतन, कांग्रेस के विधायकों की गिनती के अनुसार कैप्टन सरकार के पास समर्थ विधायकों की गिनती सत्ता में काबिज बने रहने के लिए नाकाफी है। पार्टी दोफाड़ हो चुकी है और मुख्यमंत्री कांग्रेस के नेता लंबे समय से एक-दूसरे पर अविश्वास प्रकट कर रहे हैं। कैप्टन सरकार के लिए बहुमत बनाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है। चीमा ने कहा कि अल्पमत में होने के कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह को सरकार में बने रहने का न तो नैतिक और न ही संवैधानिक अधिकार है।

आप नेता ने कहा कि कांग्रेस के अधिकांश विधायक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने की मांग कर रहे हैं। यहां तक की मुख्यमंत्री के पास कैबिनेट में भी बहुमत नहीं है। कैप्टन अब भी वर्चुअली (ऑनलाइन) कैबिनेट बैठक की खानापूर्ति कर रहे हैं। यदि स्कूल खुल सकते हैं तो मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों के साथ कैबिनेट बैठक क्यों नहीं कर सकते। चीमा ने कहा कि कैप्टन सरकार में बतौर मुख्यमंत्री टिके नहीं रह सकते। चीमा ने कहा कि पंजाब विधानसभा के स्पीकर को सदन में तुरंत फ्लोर टेस्ट कराना चाहिए, ताकि पता लग सके कि कितने विधायक कैप्टन सरकार के साथ हैं।

 

Edited By: Sunil Kumar Jha