चंडीगढ़ [कैलाश नाथ]। पंजाब कांग्रेस में इन दिनों खूब घमासान चल रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के ही विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के बीच शह-मात का खेल धीरे-धीरे प्रचंड रूप लेता जा रहा है। सिद्धू जहां कैप्टन को घेरने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं, वहीं सिद्धू के खिलाफ करीब आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री उतारने के बाद अब कांग्रेस सरकार ने सिद्धू के करीबियों की विजिलेंस फाइलें खोलनी शुरू कर दी हैं।

कोरोना महामारी के बीच चल रहे इस खेल को लेकर कांग्रेस हाईकमान दर्शक की भूमिका निभा रही है। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ भी इस पूरे प्रकरण में चुप्पी साधे हुए हैं।सिद्धू के कैबिनेट मंत्री के कार्यकाल के दौरान उनके करीबियों की विजिलेंस फाइलें खोलने से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस सरकार अब साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपना रही है।

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सिद्धू कभी कोटकपूरा की वीडियो तो कभी अपने पुराने भाषणों की क्लिपिंग ट्विटर पर डालकर लगातार अपरोक्ष रूप से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को चैलेंज कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि करीब 15 दिनों से चले आ रहे इस खेल के बावजूद पार्टी हाईकमान ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान नहीं लिया है। कोविड से उबरने के बाद पार्टी के महासचिव हरीश रावत ने एक दिन भी न तो मुख्यमंत्री से और न ही प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ से इस संबंध में बात की।

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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ अन्य मुद्दों पर तो बोल रहे हैं, लेकिन पार्टी के अंदर चल रही इस खींचतान को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। जाखड़ को खुद भी स्पष्ट नहीं है कि वह प्रदेश प्रधान रहेंगे या नहीं। क्योंकि इस पूरे प्रकरण की शुरूआत ही प्रदेश प्रधान की कुर्सी को लेकर है। सिद्धू को पार्टी हाईकमान प्रदेश प्रधान बनाना चाहता था, लेकिन कैप्टन इसके लिए तैयार नहीं थे। यही कारण है कि जब प्रदेश प्रधान के लिए दरवाजे बंद होते देख सिद्धू ने बेअदबी कांड को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही घेरना शुरू कर दिया।

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माना जा रहा है कि सिद्धू को पार्टी हाईकमान की शह है। यही कारण है कि कांग्रेस के आधा दर्जन से ज्यादा मंत्रियों ने सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई करने व उनके बयानों से कांग्रेस को नुकसान पहुंचने की बात तो की, लेकिन वह आक्रामक कभी भी नहीं हुए। पिछले दिनों जिस कैबिनेट बैठक में जाखड़ और कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस्तीफा दिया था, उसमें भी यह मुद्दा उठा था।

इस बैठक में कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से यह कह दिया था कि जिस प्रकार से सिद्धू हमला कर रहे हैं, उससे यह ही आभास होता है कि पार्टी हाईकमान उसके पीछे है। माना यह ही जा रहा है कि यही कारण है कि कांग्रेस हाईकमान ने चुप्पी साध रखी है। रविवार को भी सिद्धू ने जस्टिस रंजीत सिंह की जांच में शामिल कोटकपूरा की विडियो को सोशल मीडिया पर डाल कर परोक्ष व अपरोक्ष रूप से कांग्रेस सरकार पर हमला किया।

नवजोत सिद्धू के पक्ष में उतरे जेल मंत्री रंधावा

राज्य के जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के पक्ष में उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें विजिलेंस को विपक्ष के लोगों को डराने व धमकाने के लिए प्रयोग करती रहती हैं। रंधावा का यह बयान उस समय आया है जब नवजोत सिंह सिद्धू के करीबियों के खिलाफ विजिलेंस जांच में तेजी लाई गई है।

रंधावा ने सीधे-सीधे कैप्टन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब सिद्धू दो बार मुख्यमंत्री से मिलने गए थे। एक बार प्रदेश प्रभारी हरीश रावत के साथ और दूसरी बार कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी के साथ। उस समय कैप्टन का बयान आया कि वह सिद्धू को कैबिनेट में लेना चाहते हैं। उस समय कैप्टन ने सिद्धू से यह क्यों नहीं कहा कि आपके खिलाफ विजिलेंस जांच चल रही है इसलिए आपको कैबिनेट में नहीं ले सकते हैं।

एक चैनल से बातचीत करते हुए रंधावा ने कहा कि उनकी सिद्धू के साथ बैठक होती है और वह फोन पर उनके साथ बातचीत भी करते हैं। विजिलेंस जांच को लेकर रंधावा ने कहा कि पंजाब में विजिलेंस 1977 में आई। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने ज्ञानी जैल सिंह पर पहली बार विजिलेंस का केस बनाया। केस चला और खत्म भी हो गया। फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ विजिलेंस का केस बनाया।

बाद में बादल ने अपने मुख्यमंत्री काल में कैप्टन पर केस बनाया। रंधावा ने कहा कि सरकारें विजिलेंस का प्रयोग विरोधियों को दबाने व डराने के लिए करती हैं। अहम पहलू यह है कि रंधावा पहले ऐसे मंत्री है जो नवजोत सिंह सिद्धू के करीबियों के खिलाफ चल रही विजिलेंस जांच के बावजूद सिद्धू के समर्थन में आए हैं, जबकि सिद्धू को पार्टी से निकालने के लिए आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री लामबंद हो चुके हैं।रंधावा ने कहा कि विजिलेंस का खेल बंद होना चाहिए। रंधावा ने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हैं, क्योंकि वह उन्हें अपने पिता के रूप में देखते हैं।