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जेएनएन, चंडीगढ़। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी लाने संबंधी कैबिनेट की मीटिंग के बाद वित्त और टेक्सेशन विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग की। इस मीटिंग को काफी गोपनीय रखा गया। बैठक में क्या हुआ इस संबंध में कोई भी अधिकारी कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर किसानों और पेट्रोल पंप मालिकों का दबाव है कि वे भी कीमतों में पड़ोसी राज्यों की तरह राहत दें। किसान संगठनों ने इस बाबत मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव सुरेश कुमार से मुलाकात भी कर चुके हैं जबकि पेट्रोल-डीलर्स एसोसिएशन ने भी पंजाब में पेट्रोल पंपों को बंद करने की धमकी दी हुई है।

गत दिवस हुई मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री के वित्तीय सलाहकार वीके गर्ग ने पेट्रोल और डीजल संबंधी देशभर के आंकड़े भी रखे और बताया कि अगर सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी की तो खजाने का बहुत नुकसान होगा। मुख्यमंत्री ने टैक्सेशन विभाग से अन्य राज्यों के आंकड़े मांगे हैं।

बताया जा रहा है कि इस पर अगली मीटिंग दो नवंबर को रखी गई है क्योंकि मुख्यमंत्री 21 अक्टूबर से इजरायल के दौरे पर एक सप्ताह के लिए जा रहे हैं। वहां से लौटने के बाद ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों संबंधी कोई फैसला होगा। इसका अर्थ यह है कि तब तक पंजाब में तेल की कीमतें घटने के कोई आसार नहीं हैं।

इससे पहले भी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह स्पष्ट कर चुके हैं कि केंद्र सरकार ने तेल की जो कीमतें कम की हैं उसका ज्यादातर बोझ राज्यों पर ही पड़ा है। ऐसे में अगर तेल की कीमतें राज्य सरकारें और कम करेंगी तो उनकी आर्थिक स्थिति बुरी तरह से प्रभावित होगी।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने तेल की कीमतों में 2.50 रुपये प्रति लीटर की कमी थी और देश के भाजपा शासित राज्यों ने भी लगभग इतनी ही कमी करके लोगों को राहत पहुंचाई। पंजाब के पड़ोस में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे तीन भाजपा शासित पड़ोसी राज्य हैं जहां तेल की कीमतें पंजाब से काफी नीचे चली जाने के कारण पंजाब में पेट्रोल और डीजल की तस्करी बढ़ गई है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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