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कनाडा में 102 करोड़ में गिरवी 2 गुरुद्वारे: 88 करोड़ से ज्यादा पहुंचा ब्याज, कोर्ट ने संपत्ति बेचने पर लगाई रोक

Published: Mon, 21 Sep 2026 10:21 AM (IST)

कनाडा के ओंटारियो में दो गुरुद्वारे 102 करोड़ रुपये के भारी-भरकम लोन विवाद में फंस गए हैं, जिसमें ब्याज 88 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

कनाडा में दो गुरुघरों की प्रॉपर्टी पर कोर्ट की रोक।

कनाडा में दो गुरुघरों की प्रॉपर्टी पर कोर्ट की रोक।


HighLights

  1. कनाडा के दो गुरुद्वारे 102 करोड़ के लोन विवाद में फंसे

  2. ब्याज बढ़कर 88 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है

  3. कोर्ट ने ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति बिक्री पर रोक लगाई

रोहित कुमार, जागरण चंडीगढ़। कनाडा के ओंटारियो में दो गुरुघर भारी-भरकम लोन के विवाद में फंस गए हैं। सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो और नानकसर ठाठ ईशर दरबार की प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी से जोड़कर 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर (करीब 102.6 करोड़ रुपये) की लोन लिमिट बनाई गई थी।

ऋणदाता कंपनियों का दावा है कि इसमें से करीब 82.1 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, लेकिन किस्तों का भुगतान नहीं होने से ब्याज 1.3 करोड़ कनाडाई डॉलर यानी करीब 88.9 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

मामले में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति को बेचने और उस पर नया लोन लेने पर जनवरी में होने वाली अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

ऋणदाता कंपनियों एसएसएमटी मैनेजमेंट इंक और ऑकुलस मॉर्गेज जीपी इंक ने दोनों गुरुद्वारों, पूर्व लिबरल सांसद और वकील राजविंदर ग्रेवाल तथा उनकी लॉ फर्म आरएसजी लॉ प्रोफेशनल कॉरपोरेशन के खिलाफ कर्ज की वसूली के लिए सिविल मुकदमा दायर किया है।

15 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हुआ ब्याज

अदालत में जमा दस्तावेजों के अनुसार, एसएसएमटी ने 25 अप्रैल 2025 को सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो को एक करोड़ कनाडाई डॉलर का लोन दिया था। 20 मई को इसकी सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर कर दी गई। लोन पर शुरुआत में 15 प्रतिशत सालाना ब्याज तय था, जिसे बाद में बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दिया गया। ऋणदाता के अनुसार पूरी राशि पर हर महीने करीब 2.5 करोड़ रुपये ब्याज बन रहा है।

गुरुद्वारे की प्रॉपर्टी की सिक्योरिटी नहीं देने का आरोप

मामले में विवाद का एक बड़ा बिंदु ब्रैम्पटन स्थित नानकसर गुरुद्वारे की संपत्ति है। इसे लोन की सिक्योरिटी के तौर पर शामिल किया जाना था। ऋणदाता का आरोप है कि आरएसजी लॉ के मालिक और संचालक दविंदर खटड़ा को गुरुद्वारे की संपत्ति पर सेकेंड चार्ज दर्ज कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन यह कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसके चलते लोन के बदले मिलने वाली सिक्योरिटी को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट के जज फ्रेडरिक एल. मायर्स ने 11 सितंबर को आदेश दिया कि जनवरी में अगली सुनवाई तक ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति न बेची जा सकेगी और न ही उस पर नया लोन लिया जा सकेगा।

गुरुघरों के खातों में लाखों डॉलर के लेन-देन

मामले के दौरान आरएसजी लॉ के ट्रस्ट अकाउंट और दोनों गुरुघरों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड भी सामने आया है। लॉ सोसाइटी की कार्यवाहियों के रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल में आरएसजी लॉ के खातों से टोरंटो गुरुद्वारे को 2.5 लाख कनाडाई डॉलर की दो किस्तें और ब्रैम्पटन गुरुद्वारे को भी 2.5 लाख कनाडाई डॉलर का भुगतान किया गया था।

इसके अलावा बैंक ऑफ नोवा स्कॉटिया से जुड़े एक अलग चेक धोखाधड़ी मामले में विवादित फंड से 2.5 लाख कनाडाई डॉलर टोरंटो गुरुद्वारे के खाते में ट्रांसफर होने के सबूत भी सामने आए हैं।

दोनों गुरुघरों की मैनजमेंट ने इतना बड़ा लोन किस उद्देश्य से लिया था, इसकी जानकारी दी गई सामग्री में स्पष्ट नहीं है। मामले की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के वकीलों के बयान भी अलग हैं।

राजविंदर ग्रेवाल के वकील साइमन बीबर ने मामला सुलझने की बात कही है, जबकि ऋणदाता कंपनी की वकील मारिया नाइमार्क के अनुसार मामला अभी सुलझा नहीं है और कानूनी लड़ाई जारी है।

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