'अपराध गैंग करे, पहचान मैं क्यों छुपाऊं?' कनाडा में ‘बिश्नोई’ नंबर प्लेट पर विवाद
कनाडा में मंजू बिश्नोई की कार की 'बिश्नोई' नंबर प्लेट पर विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि ICBC ने उन्हें ...और पढ़ें
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'बिश्नोई' नंबर प्लेट पर खड़ा हुआ बड़ा विवाद।
HighLights
कनाडा में मंजू बिश्नोई की 'बिश्नोई' नंबर प्लेट पर विवाद
ICBC ने सुरक्षा कारणों से नंबर प्लेट बदलने की सलाह दी
मंजू का सवाल: अपराध गैंग करे, पहचान मैं क्यों छिपाऊं
रोहित कुमार, चंडीगढ़। कनाडा में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से जुड़े अपराधों का असर अब उन लोगों तक पहुंचता दिख रहा है, जिनका गैंग से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। ब्रिटिश कोलंबिया में भारतीय नागरिक मंजू बिश्नोई की कार की नंबर प्लेट इस विवाद का नया केंद्र बन गई है।
प्लेट पर लिखा उनका पारिवारिक सरनेम ‘बिश्नोई’ अब उनके लिए पहचान से ज्यादा सुरक्षा का सवाल बन गया है। ब्रिटिश कोलंबिया की सरकारी वाहन बीमा एजेंसी इंश्योरेंस कारपोरेशन आफ ब्रिटिश कोलंबिया (आइसीबीसी) के एक अधिकारी ने कथित तौर पर उन्हें फोन कर नंबर प्लेट बदलने की सलाह दी।
वजह बताई गई- सड़क पर कोई व्यक्ति ‘बिश्नोई’ नाम देखकर उन्हें लॉरेंस गैंग से जोड़ सकता है और उनके साथ नफरत या हिंसा कर सकता है। मंजू का कहना है कि गलती नाम की नहीं, नाम को गलत संदर्भ में देखने वालों की है।
उनका सवाल है कि अगर किसी निर्दोष नागरिक को उसके सरनेम के कारण खतरा है तो सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार और पुलिस की है या फिर नागरिक को अपनी पहचान छिपानी चाहिए?
2023 में गर्व से लगाई थी प्लेट, अब बन गई परेशानी
मंजू ने बताया कि उन्होंने 2023 में अपनी कार के लिए यह पर्सनलाइज्ड नंबर प्लेट ली थी। प्लेट पर उनके परिवार का सरनेम ‘बिश्नोई’ दर्ज है। उस समय इसे लेकर कोई विवाद नहीं हुआ और वह लंबे समय तक इसी प्लेट के साथ वाहन चलाती रहीं।
हाल के दिनों में स्थिति बदल गई। मंजू के अनुसार, भारतीय-कनाडाई समुदाय के कुछ लोगों ने उनकी कार देखकर उन्हें घेर लिया और नंबर प्लेट को लेकर बहस की। इसके बाद आइसीबीसी के अधिकारी ने फोन कर उन्हें प्लेट बदलने की सलाह दी। अधिकारी की ओर से कथित तौर पर यह भी कहा गया कि उनका किसी गैंग से संबंध नहीं है, फिर भी मौजूदा माहौल में नाम की गलत व्याख्या होने के कारण उनकी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
मंजू ने पूछा- कल किसी और पहचान पर भी यही सलाह मिलेगी?
मंजू ने नंबर प्लेट बदलने की सलाह को स्वीकार करने के बजाय इसके पीछे की सोच पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सामान्य सरनेम को देखकर किसी निर्दोष नागरिक को गैंग से जोड़ता है तो समस्या उस व्यक्ति की धारणा में है।
उनके मुताबिक, अगर आज ‘बिश्नोई’ सरनेम हटाने की सलाह दी जा रही है तो कल किसी दूसरे व्यक्ति को भी अपनी जातीय, धार्मिक या पारिवारिक पहचान छिपाने की सलाह दी जा सकती है। उनके अनुसार, पहचान छिपाना स्थायी समाधान नहीं है। लोगों को यह समझाने की जरूरत है कि एक आपराधिक संगठन के नाम और किसी परिवार के पारंपरिक सरनेम में अंतर होता है।
कैसे एक गैंग का नाम बन गया सामान्य सरनेम के लिए खतरे की वजह?
कनाडा में लॉरेंस गैंग की आपराधिक गतिविधियों को लेकर लंबे समय से जांच और कार्रवाई चल रही है। कनाडा सरकार ने 29 सितंबर 2025 को लॉरेंस गैंग को क्रिमिनल कोड के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया था। कनाडा के आधिकारिक दस्तावेजों में इसका नाम लॉरेंस बिश्नोई गैंग दर्ज है।
यहीं से ‘बिश्नोई’ नाम के दो अलग-अलग संदर्भ एक-दूसरे से जुड़ने लगे- एक तरफ हजारों लोगों का पारिवारिक सरनेम और दूसरी तरफ एक आपराधिक संगठन। मंजू का मामला इसी टकराव को सामने लाता है।
नंबर प्लेट देखकर गैंग से जोड़ना कितना सही?
यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। किसी व्यक्ति की कार की नंबर प्लेट पर उसका सरनेम लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसका किसी आपराधिक संगठन से कोई संबंध है। दूसरी ओर, आइसीबीसी की ओर से बताई गई चिंता सुरक्षा से जुड़ी है- यदि किसी नाम की वजह से व्यक्ति को धमकी या हमले का वास्तविक खतरा हो तो प्रशासन उसे संभावित जोखिम से बचाने के लिए कदम उठा सकता है।
यानी विवाद केवल इस बात पर नहीं है कि प्लेट रखी जाए या बदली जाए। असली सवाल यह है कि सुरक्षा के नाम पर किसी निर्दोष व्यक्ति की पहचान बदलने की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति पर डाली जाए या उन लोगों पर कार्रवाई हो जो पहचान के आधार पर उसे निशाना बना रहे हैं।
कनाडा में पर्सनलाइज्ड प्लेट के भी हैं नियम
ब्रिटिश कोलंबिया में पर्सनलाइज्ड नंबर प्लेट के लिए तय नियम हैं। हिंसा, अपराध, गैंग, आतंकवाद, अश्लीलता या नफरत फैलाने वाले शब्दों को मंजूरी नहीं दी जाती। किसी समुदाय, जाति, धर्म या मूल के खिलाफ भेदभावपूर्ण संदेश भी स्वीकार्य नहीं है। किसी प्लेट को पहले मंजूरी मिलने के बाद यदि उसका इस्तेमाल या अर्थ बाद में आपत्तिजनक माना जाए तो संबंधित एजेंसी उसे वापस लेने की कार्रवाई कर सकती है।
लेकिन ‘बिश्नोई’ मामले में पेच यही है कि यह शब्द केवल गैंग की पहचान नहीं है। यह भारतीय समाज में इस्तेमाल होने वाला पारिवारिक सरनेम भी है। इसलिए सवाल यह उठता है कि क्या किसी आपराधिक संगठन के नाम में शामिल सामान्य सरनेम को देखकर उसी सरनेम वाले हर व्यक्ति की पहचान संदिग्ध मानी जा सकती है?
एक नंबर प्लेट ने खड़ा कर दिया बड़ा सवाल
मंजू बिश्नोई का मामला अब सिर्फ एक महिला की नंबर प्लेट का विवाद नहीं रह गया है। यह इस बात की बहस बन गया है कि किसी आपराधिक संगठन की गतिविधियों का असर उसके नाम से मिलती-जुलती सामान्य पहचान रखने वाले लोगों पर कितना पड़ सकता है।
लॉरेंस गैंग की गतिविधियों के कारण ‘बिश्नोई’ नाम को लेकर धारणा बदली है, लेकिन मंजू का कहना है कि किसी गैंग का अपराध किसी परिवार की पहचान नहीं हो सकता।
यही वजह है कि उनकी कार की नंबर प्लेट अब कनाडा में एक बड़े सवाल का प्रतीक बन गई है- अपराधी की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए या उसके जैसे सरनेम वाले हर व्यक्ति को भी अपनी पहचान साबित करनी होगी
