चंडीगढ़ [कमल जोशी]। मोहाली के नए बस अड्डेे और विभिन्न जिलों में औद्योगिक प्रशिक्षक केंद्र (ITI) के बेकार पड़े भवनों में करोड़ों के सरकारी निवेश से पंजाब सरकार सबक लिया है। अब यह फैसला किया गया है कि भविष्य में सरकारी निवेश से पहले उसके भावी परिणामों को निर्धारित किया जाएगा। राज्य के सरकारी निवेश को वित्तीय और सामाजिक तौर पर लाभप्रद बनाने के लिए पंजाब सरकार ने पब्लिक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट (PIM) यूनिट का गठन किया है। भविष्य में इस यूनिट से हरी झंडी मिलने पर ही मंत्रिमंडल किसी सरकारी प्रोजेक्ट में निवेश को मंजूरी देगा।

यह यूनिट राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्टों में निवेश की व्यावहारिकता और उपयोगिता पर विस्तृत विचार करके अपनी रिपोर्ट देगी। इस यूनिट की सिफारिशों के आधार पर ही राज्य सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्टों में निवेश करने पर फैसला लेगी। योजना विभाग के प्रमुख सचिव जसपाल सिंह ने इस यूनिट के गठन की पुष्टि की है।

इसके तहत मुख्य सचिव के नेतृत्व में PIM कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें वित्त और योजना विभाग के प्रशासनिक सचिव सदस्य होंगे। इसके अलावा योजना विभाग में एक PIM डिवीजन स्थापित की जाएगी।

यह कमेटी सार्वजनिक प्रोजेक्टों के प्रस्ताव, आवश्यकता और व्यावहारिकता का अध्ययन करेगी। इसके अलावा यह कमेटी भावी प्रोजेक्टों की लागत, आर्थिक और वित्तीय विश्लेषण के अलावा निवेश पर मिलने वाले सामाजिक और वित्तीय लाभ पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। यह कमेटी किसी बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्ट से पूर्व उसके डिजाइन और तत्कालीन वित्तीय परिवेश में उसके प्रभाव और लक्ष्यों पर अपनी रिपोर्ट मंत्रिमंडल को देगी।

डिवीजन होगा स्थायी सचिवालय

PIM यूनिट के तहत स्थापित की जाने वाली PIM डिवीजन ही PIM कमेटी का स्थायी सचिवालय होगा। यह डिवीजन सार्वजनिक निवेश प्रबंधन में सुधार लाने के लिए नियम और निर्देश निर्धारित करेगी। PIM डिवीजन विभिन्न चरणों में चल रहे बड़े सरकारी प्रोजेक्टों में आ रही दिक्कतों का समाधान भी ढूंढ़ेगी। नए सरकारी प्रोजेक्टों के लिए यह डिवीजन ही प्रोजेक्ट टीमों का गठन और तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाने वाले विभाग निर्धारित करेगी।

सरकारी भवनों में बांधे जा रहे जानवर

लगभग दस सालों से अधर में लटके निर्माण के चलते मोहाली बस अड्डे के प्रोजेक्ट में पंजाब सरकार का करोड़ों का निवेश फंसा हुआ है। ऐसे ही विभिन्न जिलों में पंजाब सरकार ने लगभग एक दर्जन ITI संस्थानों का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन बिना किसी पूर्व अध्ययन के किए गए इस निवेश से बने भवनों को लोग अब अपने जानवर बांधने के कामों में ला रहे हैं।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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