जेएनएन, चंडीगढ़। भाजपा के बागी काउंसलर सतीश कैंथ की शुक्रवार को कांग्रेस में घर वापसी हो गई। सतीश कैंथ ने सेक्टर-35 स्थित कांग्रेस भवन में कांग्रेस कैंडिडेट पवन कुमार बंसल और अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा की मौजूदगी में शामिल होने का एलान किया। इससे पहले सतीश कैंथ ने कांग्रेस छोड़कर 2015 में भाजपा ज्वाइन कर ली थी। सतीश कैंथ ने पवन कुमार बंसल के पांव छूकर आशीर्वाद लिया और उनसे हुई गलती पर माफी भी मांगी। कहा कि उन्हें लगा था कि भाजपा की नीतियां बेहतर हैं, वहां उनके समाज और दलितों को सम्मान मिलेगा। लेकिन दूर के ढोल सुहावने लगते हैं, यह स्थिति भाजपा की निकली। सभी वायदे जुमले और ढकोसले ही हैं। वे काउंसलर चुनकर आए हैं, उनकी लोगों के प्रति जिम्मेदारी बनती है, लोग उनसे जवाब मांगते हैं। लेकिन भाजपा ने शहर को बर्बाद कर दिया है। जो शहर पहले पेरिस कहा जाता था, अब वह 20वें नंबर पर है। अभी तो भाजपा की टिकट घोषित होने की देर है, उसके बाद कई बड़े नेता और काउंसलर कांग्रेस में आने वाले हैं।

विधवा का मकान हथियाने के मामले में लगे हैं कैंथ पर आरोप

कैंथ कई मामलों में खासी चर्चा में रहे हैं। एक विधवा का मकान हथियाने का मामला भी उन पर है। प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि कांग्रेस का परिवार बड़ा हो रहा है। वीरवार को अनवर उल हक और उनकी पत्नी जन्नत जहां ने कांग्रेस ज्वाइन की थी, शुक्रवार को सतीश कैंथ सहित कई भाजपा के पदाधिकारी कांग्रेस में आए हैं। यह सिलसिला अब जीत सुनिश्चित होने तक जारी रहेगा।

आप के जोगिंद्र भी अब कांग्रेस में

आप के युवा नेता जोगिंद्र भी कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हुए। जोगिंद्र ने कहा कि आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ही कांग्रेस के पीछे गठबंधन के लिए दौड़ रहे हैं। वह कांग्रेस से गठबंधन को उत्सुक हैं। ऐसे में कांग्रेस ही शहर और देश को आगे ले जा सकती है।

बबला को नहीं मिली मंच पर जगह, नाराज होकर कार्यक्रम छोड़ चले गए

सतीश कैंथ को कांग्रेस में लाने में अहम भूमिका निभाने वाले काउंसलर देवेंद्र बबला को मंच पर जगह नहीं मिली। इससे नाराज होकर बबला कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर निकल गए। उनके जाते ही पूरा माहौल चर्चाओं से गर्म हो गया। कार्यक्रम के दौरान ही बातें होने लगी कि बबला भाजपा ऑफिस पहुंच गए हैं। हालांकि देवेंद्र सिंह बबला ने इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। उन्होंने माना कि वे कार्यक्रम से गुस्सा होकर जरूर निकले हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भाजपा कार्यालय गए हैं। वह गुस्सा इस बात पर हुए कि जो नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उन्हें मंच पर जगह मिलनी चाहिए, मान-सम्मान मिलना चाहिए। लेकिन मंच पर पहले ही कांग्रेस के पदाधिकारी बैठ चुके थे। जिस कारण पार्टी में शामिल होने वालों को मंच पर खड़े होने की भी जगह नहीं मिल रही थी। वह गुस्सा जरूर हुए, लेकिन उनको आगे की व्यवस्था देखनी थी, इसलिए बीच में ही निकल गए थे।

भाजपा को घेरते रहे हैं बबला

बबला ने बताया कि सोमवार को पूर्व पार्षद विजय राणा भी कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। वे अभी भाजपा में हैं। सतीश कैंथ को देवेंद्र बबला और मुकेश बस्सी ही भाजपा से कांग्रेस में लेकर आए हैं। देवेंद्र बबला कांग्रेस के काफी मजबूत काउंसलर हैं, नगर निगम हाउस में वह अकेले ही भाजपा काउंसलर्स को घेरते रहे हैं।

कांग्रेस का एक वोट बढ़ा, भाजपा का घटा

सतीश कैंथ के कांग्रेस में शामिल होने के बाद भाजपा का नगर निगम में एक वोट कम हो गया है और कांग्रेस का बढ़ा है। फर्क अगले दो मेयर चुनाव में पता चलेगा। कैंथ के आने से कांग्रेस काउंसलरों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। जबकि भाजपा के 20 काउंसलर हैं। एक पार्षद अकाली और एक निर्दलीय है।

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