'वारिस पंजाब दे' को खतरा बताने पर भड़के अकाली दल के अयाली और खालसा, बोले- 'सिख कौम पर हमला मंजूर नहीं'
अकाली दल के नेताओं मनप्रीत सिंह अयाली और सरबजीत सिंह खालसा ने 'वारिस पंजाब दे' को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर कड़ा विरोध जताया है।

अयाली बोले सिख कौम ने देश की आजादी और सुरक्षा में कुर्बानियां दी हैं।
HighLights
अकाली नेताओं ने 'वारिस पंजाब दे' को खतरा बताने का विरोध किया
सिख कौम ने देश की आजादी और सुरक्षा में कुर्बानियां दी हैं
पार्टी के खिलाफ चल रही कार्रवाई रोकने की मांग की गई
रोहित कुमार, चंडीगढ़। अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सरदार मनप्रीत सिंह अयाली और सांसद भाई सरबजीत सिंह खालसा ने कड़ा एतराज जताया है।
पार्टी की मान्यता और चुनाव संबंधी विवाद को लेकर हाई कोर्ट में चल रही कार्रवाई के दौरान पार्टी को सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर नेताओं ने इसे सिख कौम और उसकी राजनीतिक आवाज को लेकर गंभीर टिप्पणी करार दिया।
सिख कौम ने देश की आजादी के लिए दी है कुर्बानियां
दोनों नेताओं ने मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर पार्टी के खिलाफ की जा रही कार्रवाई रोकने की मांग की। नेताओं ने कहा कि सिख कौम ने देश की आजादी से लेकर उसकी सुरक्षा तक में बड़ी कुर्बानियां दी हैं।
ऐसे समुदाय की राजनीतिक पार्टी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताना बेहद दुखद है।
पार्टी ने नहीं किया ऐसा काम जिसे बताया जाए देशविरोधी
उन्होंने कहा कि पार्टी के दो सांसद संसद में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके बावजूद पार्टी की ओर से ऐसी कोई गतिविधि नहीं की गई, जिसे देशविरोधी कहा जा सके।
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उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक पार्टी की गतिविधियों को लेकर सरकार या किसी अन्य पक्ष को आपत्ति है तो उसके संबंध में तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।
राजनीतिक विरोध के कारण किसी पार्टी पर देश की सुरक्षा से जुड़ा इतना गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। नेताओं ने कहा कि पार्टी की मान्यता से जुड़े मामले में भी उचित निर्णय लिया जाना चाहिए और उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई को तत्काल रोका जाए।
गुरुओं के बलिदान का दिया हवाला
अयाली और खालसा ने कहा कि सिख गुरुओं ने हमेशा जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और दूसरे धर्मों की रक्षा के लिए बलिदान दिया। नौवें पातशाह गुरु तेग बहादुर जी ने दूसरे धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया, जबकि गुरु गोबिंद सिंह जी ने जुल्म के खिलाफ संघर्ष किया।
देश की आजादी के आंदोलन में भी सिख समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में कुर्बानियां दीं। उन्होंने कहा कि आबादी में हिस्सेदारी कम होने के बावजूद देश के लिए सिखों का योगदान बहुत बड़ा रहा है।
सीमा की सुरक्षा से लेकर अन्न भंडार भरने तक योगदान
पार्टी नेताओं ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में सिख सैनिकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सिख रेजिमेंट और पंजाब के सिख जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपनी जानें कुर्बान की हैं।
पंजाब के किसानों ने भी देश के अन्न भंडार को भरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में सिख समुदाय और उसकी राजनीतिक पार्टी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताना उचित नहीं है।
नेताओं ने राज्य सरकार और अन्य सिख राजनीतिक दलों से भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब के मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस तरह की कार्रवाई से समाज में गलत संदेश जा रहा है।
पार्टी ने कहा कि उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है और उसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखने का पूरा अधिकार है।
