जेएनएन, पटियाला/चंडीगढ़। कांग्रेस पंजाब प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने बुधवार को घनौर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मदन लाल जलालपुर से मुलाकात की और उनका समर्थन किया। कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह सुनिश्चित करेंगे कि जलालपुर जीत हासिल करें। वहीं, सिद्धू के इस बयान के बाद राजनीति गरम हो गई है। दरअसल, कैप्टन अमरिंदर सिंह के कभी नजदीकी रहे जलालपुर पर रेत माफिया, नकली शराब बिकवाने आदि के आरोप लगते रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल के पूर्व मंत्री और मुख्य प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि जिनके बारे में सिद्धू खुद कहते रहे हैं कि वह माफिया के खिलाफ हैं और इसे एक्सपोज किया जाना चाहिए, उसी विधायक के घर जाकर नवजोत सिद्धू ने उसे समर्थन दिया। सिद्धू ने कहा कि मदनलाल जलालपुर उनके पहले उम्मीदवार होंगे।

सिद्धू ने बुधवार को जलालपुर के आवास पर कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह सुनिश्चित करेंगे कि जलालपुर जीत हासिल करें। वह घनौर सीट के चुनाव को जलालपुर का नहीं बल्कि अपना चुनाव मान कर चलेंगे। इससे चर्चा शुरू हुई कि सिद्धू जहां माइनिंग और शराब माफिया की गतिविधियों में शामिल राजनेताओं पर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं, वहीं जलालपुर को इस तरह वह किस लिहाज से सपोर्ट कर रहे हैं, क्योंकि जलालपुर पर भी माइनिंग और अवैध शराब गतिविधियों में संलिप्त लोगों से संबंध रखने के आरोप लगते रहे हैं।

पटियाला जिला से संबंधित कांग्रेसी विधायकों में से मदन लाल जलालपुर ही पहले ऐसे विधायक थे, जिन्होंने सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस प्रधान बनाए जाने की पैरवी की थी। उसके बाद सिद्धू बतौर प्रधान ताजपोशी होने से पहले ही जलालपुर के घर चले गए थे। जलालपुर द्वारा इस तरह सिद्धू की खुलेआम सपोर्ट ने सीएम सिटी में कांग्रेसी गलियारों में चर्चा छेड़ दी थी कि ऐसा करके उन्होंने कै. अमरिंदर सिंह और सांसद परनीत कौर की एक तरह से खिलाफत की है।

जलालपुर इससे पहले भी कई बार चर्चा में बने रहे हैं। जहां उनका हलका घनौर अवैध शराब और माइनिंग की गतिविधियों के कारण समय-समय पर सुर्खियों में बना रहा है वहीं जलालपुर पर भी इन गतिविधियों में शामिल लोगों की मदद करने के आरोप लगते रहे हैं, अब जबकि वह सिद्धू कैंप से लगातार जुड़े हैं तो चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें अमरिंदर कैंप से सहयोग के बजाय अंदरखाते विरोध का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले घनौर हलका के 100 से ज्यादा गांवों के कांग्रेसी लीडर और वर्कर जलालपुर के खिलाफ माइनिंग और अवैध शराब की गतिविधियों में लगे आरोपों की जांच की मांग भी कर चुके हैं।

बुधवार को जलालपुर के आवास पर नवजोत सिद्धू ने जहां उन्हें खुलेआम सपोर्ट किया वहीं कैबिनेट मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी जलालपुर का हौसला बढ़ाया। इस मौके पर चन्नी ने कहा कि घनौर विधायक जलालपुर पार्टी के वफादार नेता हैं। लोकसभा चुनाव में पटियाला संसदीय सीट पर कांग्रेस की जीत में इनकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि पूरी पार्टी जलालपुर के साथ है और अगर किसी ने जलालपुर को गलत तरीके से तंग करने की कोशिश की तो उसे बख्शा नहीं जाएगा फिर वह चाहे पार्टी का ही कोई लीडर हो।

वहीं, अकाली नेता चीमा ने हैरानी जताते हुए सिद्धू से कहा कि वह विपक्षी पार्टियों को छोड़ दें, अपनी बात भी छोड़ दें। थोड़े दिन पहले मदन लाल जलालपुर के हलके के कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक बड़ी रैली करके आरोप लगाया था कि उनका विधायक भ्रष्ट है। रेत माफिया से मिला हुआ है और नकली शराब बिकवाता है। यदि आप ठीक कहते हो तो आपने अपने विधायक के खिलाफ क्या कार्रवाई की है।

डॉ. चीमा ने कहा कि ओहदों के साथ कैसे चेहरे बदल जाते हैं यह नवजोत सिद्धू को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। पंजाब की जनता के सामने सारी सच्चाई आ गई है। आपका असली चेहरा एक्सपोज हो गया है। जनता समय आने पर इसका जवाब देगी। पूर्व मंत्री डॉ. चीमा ने कहा कि नवजोत सिद्धू की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है।

सिद्धू बोले- पंजाब सरकार व कांग्रेस किसानों के साथ

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि आगामी विधानसभा सेशन में केंद्र के तीनों कृषि कानूनों में किसी प्रकार का संशोधन करने के बजाय इन्हें सिरे से ही रद कर दिया जाएगा। सिद्धू ने कहा कि इन कृषि कानूनों को सिरे से रद करना पंजाब का अधिकार है। वह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री कै. अमरिंदर के साथ लिखित और बैठक में भी चर्चा कर चुके हैं। पंजाब सरकार और कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है।

अफसरों को कंट्रोल करके लेंगे बनता एक्शन: रंधावा

इस मौके पर मौजूद कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि अकाली सरकार द्वारा हस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौते (पीपीए) गलत हैं। इन समझौतों पर हस्ताक्षर करने वाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, इन पीपीए को करने वाली पिछली सरकार की पार्टी को भी ध्यान में रखा जाएगा। रंधावा ने कहा कि आरोप हमेशा राजनीतिक नेताओं पर लगता है, लेकिन मलाई खाने वाले अफसर बच जाते हैं, इसलिए मलाई खाने वाले इन अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अकाली दल द्वारा 400 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रंधावा ने कहा कि यह सब झूठ है। अगर अकाली दल ने ऐसा करना होता तो अपनी सरकार के समय कर देता। कृषि कानूनों के मुद्दे संबंधी उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उन्हें मिलने का समय नहीं दे रहे हैं। पंजाब में खाद की किल्लत को लेकर केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री दफ्तर से कई बार संपर्क किया जा चुका है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

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Edited By: Kamlesh Bhatt