जासं, चंडीगढ़ : प्रशासन ने शहर में बनने वाली फायर एकेडमी के लिए जमीन देने से नगर निगम को इन्कार कर दिया है, ऐसे में इस प्रोजेक्ट में अड़चन पैदा हो गई है। ऐसे में नगर निगम के अतिरिक्त कमिश्नर अनिल गर्ग ने एक बार फिर से प्रशासन को इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने के लिए कहा है। नगर निगम ने अपने इस साल पास किए बजट में भी एकेडमी बनाने के लिए दो करोड़ रुपये का फंड रखा है। दो एकड़ जमीन पर फायर एकेडमी बननी है। इससे पहले प्रशासन पिछले साल शहर में फायर एकेडमी बनाने के लिए जमीन मांगी थी। नगर निगम का दावा है कि इसका फायदा पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा। क्योंकि हरियाणा, हिमाचल, पंजाब में भी कोई ऐसी एकेडमी नहीं है। भरती होने के बाद फायरकर्मियों और समय-समय पर कर्मचारियों को प्रमोशन की ट्रेनिग के लिए एकेडमी जाकर रहना पड़ता है। एकेडमी में छह का कोर्स होता है। इस समय चंडीगढ़ फायर विभाग के कर्मचारी नागपुर एकडमी में ट्रेनिग करने के लिए जा रहे हैं। चंडीगढ़ में फायर एकेडमी बनने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेगा क्योंकि बड़ी इमारतों में भी कंपनियों की ओर से फायर कर्मचारी तैनात किए जाते हैं, लेकिन कंपनियां उन्हें ही तैनात करती हैं जिनके पास एकेडमी से छह माह का कोर्स किया हुआ हो। छह माह का होता है कोर्स

चंडीगढ़ में एकेडमी खुलने से नगर निगम भी कमाई बढ़ेगी, क्योंकि जो कोर्स करने के लिए चंडीगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा और हिमाचल से आएगा वह नगर निगम को फीस भी अदा करेगा। इस समय नगर निगम की ओर से जो छह माह के कोर्स के लिए अपनी कर्मियों को नागपुर भेजा जाता है, उसका शुल्क नगर निगम ही अदा करता है। एकेडमी में सब फायर स्टेशन फायर अधिकारी और डिवीजन फायर अधिकारी नियुक्त होने के लिए छह माह का कोर्स होता है। जहां पर टेक्निकल जानकारी के अलावा आग बुझाने के नए नए तरीके बताए जाते हैं। इसके अलावा एकेडमी में स्पो‌र्ट्स कांप्लेक्स के अलावा कालेज भी होता है। कोर्स करने वाला छह माह तक एकेडमी में ही रहता है।

Posted By: Jagran

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