जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : नगर निगम के सरकारी बैंक खाते से फर्जी चेक लगाकर 28 लाख रुपये निकालने के बाद अकाउंट ब्रांच संदेह के घेरे में है। इसका कारण है बैंक खाते की चेकबुक निगम में ही कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत एक कर्मचारी के पास होना। वह निगम के एक अफसर का बेटा भी है। हालांकि सरकारी बैंक खाते की चेकबुक नियमानुसार डीडीओ की कस्टडी में होनी चाहिए। इस लापरवाही के चलते नगर निगम के बैंक खाते से 28 लाख 50 हजार निकलने के बाद दो चेक के माध्यम से एक करोड़ 21 लाख रुपये धोखाधड़ी से निकालने की कोशिश की गई। इसका पता चलने के बाद चीफ अकाउंट आफिसर वरिदर सिंह ठाकुर की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आइपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

बैंक खाते की चेकबुक कॉन्ट्रैक्ट कर्मी के पास होने की निगम के अफसर बुधवार को पुष्टि करने से बचते रहे। सूत्रों के अनुसार सरकारी खाते से लाखों रुपये निकाले जाने का खुलासा होने के बाद आला अधिकारियों को एक रिपोर्ट बनाकर भेजी गई है। इसमें चेक बुक कॉन्ट्रैक्ट कर्मी के पास होना दर्शाया गया है। वहीं, सरकारी बैंक अकाउंट से लिंक मोबाइल नंबर भी एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मी का निकला है। सूत्रों की मानें तो निगम अधिकारी इसमें शामिल कॉन्ट्रैक्ट कर्मी सहित जिम्मेदार अफसर पर गाज गिरा सकते हैं।

जानकारी के अनुसार 11 अक्टूबर को नगर निगम के बैंक अकाउंट से 28 लाख 51 हजार रुपये का एक अकाउंट पेई चेक लगाकर आरोपित ने कैश करवा लिया। इसके बाद आरोपित ने 18 अक्टूबर तक दो अलग-अलग चेक भी बैंक ऑफ बड़ौदा में लगा दिया। इसमें एक चेक 98 लाख 51 हजार रुपये और दूसरा चेक 22 लाख 50 हजार रुपये का था। इस संबंध में निगम के चीफ अकाउंट आफिसर से संपर्क करने के बाद धोखाधड़ी उजागर हुई।

Edited By: Jagran