पंजाब की राजनीति में बड़ा खेल, आम आदमी पार्टी ने वापस ली सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा
पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस ले ली है। आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
रोहित कुमार, चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया और अब पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली है। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई वाली पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा को दी गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा हटा दी है। गौरतलब है कि चड्ढा को पंजाब के सह-प्रभारी और राज्यसभा सांसद होने के नाते यह सुरक्षा मिली हुई थी। सुरक्षा वापसी को पार्टी के अंदर बढ़ती दूरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
इससे पहले 2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को भी सूचित कर दिया कि अब चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद से ही चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी।
राघव चड्ढा ने क्या कहा था?
राघव चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि उन्हें “खामोश” करने की कोशिश की गई है, लेकिन वे हार मानने वालों में नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनकी खामोशी को कमजोरी न समझा जाए। इसके जवाब में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज, आतिशी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान खुलकर सामने आए और चड्ढा पर पार्टी लाइन से हटने के आरोप लगाए।
इसी बीच आम आदमी पार्टी के दिग्गज सौरभ भारद्वाज ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया कि केंद्र सरकार राघव चड्ढा को जेड प्लस सुरक्षा देने की तैयारी में है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार चड्ढा पर इतनी मेहरबान क्यों दिख रही है। हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों का कहना है कि अभी उन्हें केंद्र से कोई सुरक्षा नहीं मिली है, लेकिन जल्द ऐसी संभावना बन सकती है।
आप और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती जा रहीं दूरियां
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपनेता पद से हटाने और सुरक्षा वापस लेने जैसे फैसले पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों की ओर इशारा करते हैं। वहीं, केंद्र से संभावित सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस पूरे विवाद को और पेचीदा बना दिया है। फिलहाल, राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती दूरी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज हो सकता है।
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