सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़

नगर निगम चुनाव से सरकारी स्कूल में कार्यरत टीचर्स को बड़ी उम्मीदें है। शहर में 114 सरकारी स्कूल है, जिसमें एक लाख 60 हजार स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे है। स्कूल में स्टूडेंट्स को शिक्षा देने वाले 80 फीसद टीचर्स यूटी कोटे से हैं तो 12 फीसद अध्यापक पंजाब और आठ फीसद हरियाणा से डेपुटेशन से शहर में आकर काम कर रहे है। इसी प्रकार से शहर के स्कूल को विभिन्न जरूरतें है जिन्हें पूरा कराने की टीचर्स की उम्मीद नगर निगम चुनाव से है।

यूटी कैडर एजुकेशन यूनियन प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि शहर में 42 सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, लेकिन शहर के स्टूडेंट्स को उसमें एडमिशन नहीं मिल पाता। इसी प्रकार से नौकरी में भी पंजाब, हरियाणा से लेकर दूसरे राज्यों के युवा आकर अप्लाई करते है और सरकारी नौकरी हासिल कर भी लेते है, लेकिन चंडीगढ़ युवा नौकरी पाने में नाकाम रह रहे है। निगम चुनाव से उम्मीद है कि इस बार प्रशासन से मिल ऐसी व्यवस्था तैयार हो कि शहर के युवाओं को 85 फीसद आरक्षण मिले। शिक्षक भर्ती नियमों में संशोधन की जरूरत

डेपुटेशन पर कार्यरत बरिदर सिंह ने बताया कि शिक्षकों की भर्ती का नियम 60 के दशक में तैयार किया गया। उस समय शहर की आबादी 45 हजार थी लेकिन आज जनसंख्या 12 लाख के करीब है। जो नियम उस समय बने वह आज के समय में लिए काफी नहीं है। नियमों में संशोधन होना जरूरी है, ताकि टीचर्स की संख्या में बढ़ोतरी हो और स्टूडेंट्स को बेहतर शिक्षा मिले। हेरिटेज इमारतों के चक्कर में स्टूडेंट्स और टीचर्स सुविधाओं से वंचित

डेपुटेशन पर कार्यरत राजीव कुमार ने बताया कि शहर के 97 से ज्यादा सरकारी स्कूल वर्ष 2000 से पहले की बने हुए है। कई स्कूलों को हेरिटेज का दर्जा भी दिया गया है। हेरिटेज इमारत होने के चलते उसमें स्टूडेंट्स के लिए मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा गया है। स्कूल में दिव्यांग स्टूडेंट्स के साथ शिक्षक भी हैं जिनके लिए क्लास रूम या फिर शौचालय का इस्तेमाल करना बहुत बड़ी मुश्किल है। हेरिटेज इमारतों पर काम करना समय की जरूरत है, ताकि बेहतर मूलभूत सुविधाएं मिलें। टीचर्स की ट्रांसफर को लेकर परेशानी है। कई अध्यापक ऐसे है जो कि दो-दो दशकों से एक ही स्कूल में लगे हुए है। ट्रांसफर पालिसी होनी चाहिए ताकि बच्चों को हर अध्यापक के अनुभव का लाभ मिले।

- भूपिदर कौर, अध्यापिका। आज स्कूल में टीचर्स की एक हजार से ज्यादा की कमी है। जिसका खामियाजा स्टूडेंट्स भु्गत रहे है। टीचर्स के पास ज्यादा काम है जिसे संभाला जा सकता है, लेकिन स्टूडेंट्स को बेहतर अध्यापक न मिलने से उसका भविष्य बर्बाद हो रहा है।

- अभिषेक वशिष्ठ, अध्यापक।

Edited By: Jagran