चंडीगढ़, जेएनएन। पंजाब यूनिवर्सिटी के जिम्नेजियम हाल में शनिवार को यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (यूआइएलएस) के चौथे दीक्षांत समारोह में पांच वर्षीय एकीकृत लॉ ऑनर्स कोर्स और डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के स्टूडेंट्स को डिग्रियां देकर सम्मानित किया गया। इस कन्वोकेशन में सबसे आकर्षित करने वाला क्षण वह था तब 2017 बैच के जगदीश (ब्लाइंड) और रविंदर कुमार (दिव्यांग) और पीयू के ही सिक्योरिटी ऑफिसर विक्रम सिंह को सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत पहुंचे। सूर्यकांत पीयू लॉ विभाग के पूर्व छात्र हैं जिन्होंने यहीं से अपनी वकालत की शुरुआत की और आज सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्त हैं।

इस दौरान सूर्यकांत ने स्टूडेंट्स से अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्हें अपने कर्तव्य के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करने की सलाह दी। उनके अलावा कार्यक्रम में पीयू वीसी प्रो. (डॉ.) राजकुमार, न्यायमूर्ति राजीव शर्मा, न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन और दया चौधरी, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। 23 पदक विजेता होंगे सम्मानित यूआइएलएस और कानून विभाग दोनों से लगभग 800 स्नातकोत्तर और स्नातक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गई। 2016, 2017 और 2018 में उत्तीर्ण यूआइएलएस के छात्रों ने अपनी डिग्री प्राप्त की। अनु चतरथ जो डीन फैकल्टी ऑफ लॉ हैं, ने यह भी घोषणा की कि 23 पदक विजेताओं को श्री जीके चतरथ मेमोरियल फंड के तत्वावधान में 2100 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

पढ़ाई में नहीं आई बाधा : जगदीश

2017 बैच के जगदीश जो आंखों से देख नहीं सकते हैं, उन्होंने एक प्रेरणादायक मिशाल पेश की। आंखों की रोशनी न होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लॉ डिग्री प्राप्त की। जगदीश ने कहा कि पढ़ाई करने में उन्हें कोई बाधा नहीं आई। उन्होंने साधारण तरीके से पढ़ाई की और उसका फल सबके सामने है। इंसान को अपना मन की शक्ति पर हमेशा विश्वास होना चाहिए।

कानून की जानकारी हासिल करने के लिए की लॉ : विक्रम सिंह

विक्रम ने कहा कि मुझे शुरू से कानून के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने की एक ललक थी लेकिन कभी मौका नहीं मिला। एक दिन ऐसे ही किसी ने कहा कि लॉ विभाग के इव¨नग क्लास से लॉ कर ले, उसके बाद वह लालसा एक बार फिर जाग गई और मैंने इवनिंग क्लास में एडमिशन ले लिया। विक्रम पिछले 11 वर्षो से पीयू में कार्य कर रहे हैं।

हिम्मत नहीं हारी : रविंदर

रविंदर कुमार ने कहा कि कुछ लोग दिव्यांग होने की वजह से हार मान लेते हैं लेकिन मैंने हार को हराया। पैरों से न चलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लॉ के लिए उन्होंने खूब मेहनत की। डिग्री हासिल करने के बाद उनका आधा सपना सच हो गया है। अब उन्हें सपने को पूरा करने के लिए अगले पड़ाव पर चलना है।

 

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