चंडीगढ़/पठानकोट, जेएनएन। जल्‍द ही वह घड़ी आएगी जब पंजाब और इसके आसपास के राज्‍यों में पानी की कमी नहीं रहेगी। इसके साथ ही पाकिस्‍तान जा रहा पंजाब की नदियों का रोकने की व्‍यवस्‍था पूरी हो जाएगा। इसके बाद पड़ोसी देश पाकिस्‍तान को पानी के लिए तरसना होगा और पंजाब और उत्‍तर भारत के अन्‍य राज्‍यों में जल संकट का काफी हद तक निवारण हाेगा। यह संभव होगा करीब 41 साल पहले देखे गए शाहपुर कंडी परियाेजना के सपने के साकार होने से। इसका कार्य कई बाधाओं और व्‍यवधान के बाद तेज गति से चल रहा है। इसके बाद रावी नदी का पानी पा‍किस्‍तान नहीं जाएगा और उसकी हेकड़ी भी निकलेगी। यह परियोजना पंजाब और जम्‍मू कश्‍मीर की बिजली की कमी को भी पूरा करेगी।

पठानकोट जिले के शाहपुरकंडी क्षेत्र में बैराज निर्माण तेजगति से आगे तरफ बढ़ रहा है। लाॅकडाउन में काम बंद हो गया था और 30 अप्रैल को दोबारा इसे शुरू किया गया है। पंजाब एवं केंद्र सरकार की इस साझा परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य मई 2022 निर्धारित किया गया है। इस बांध के सपने को साकार करने में सरकारी तंत्र ने पूरी ताकत झोंक दी है। रावी दरिया पर बनने वाले इस बैराज का विवादों से नाता रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकारों ने बांध को बनाने में रुचि तो दिखाई, लेकिन इसमें कोई न कोई अड़ंगा लगता रहा। कभी होने वाले खर्च तो कभी जमीन को लेकर और कभी जल व बिजली के बंटवारे सहित अन्‍य बिंदुओं पर।

यही कारण है कि ढाई दशक पहले शुरू हुई इस परियोजना का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सकी है। शाहपुर कंडी परियोजना पर 2785 करोड़ की राशि व्यय होने का आंकलन है। बांध से 35 हजार हेक्टेयर भूमि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी।

इसलिए पड़ी आवश्यकता

शाहपुरकंडी में रणजीत सागर बांध परियोजना पहले से ही कार्यान्वित है। लेकिन, इस परियोजना से पानी छोड़ने पर करीब छह हजार क्यूसिक पानी पाकिस्तान चला जाता है। बांध से एक समय 24 हजार क्यूसिक पानी छोड़ने पर नहर 18 हजार पानी ही संभाल पाती है। इसका सीधा लाभ पड़ोसी मुल्क को मिलता है। इस पानी का समुुचित प्रयोग करने के लिए शाहपुर कंडी बैराज का निर्माण किया जा रहा है।

 यह होगा लाभ

बांध के बनने से पंजाब के साथ ही जम्मू -कश्मीर को भी लाभ होगा। बांध से 206 मेगावाट बिजली तैयार होगी। जबकि पंजाब की 5000 हेक्टेयर एवं जेएंडके की 32172 हेक्टेयर भूमि भी सिंचित होगी। इसके साथ ही पर्यटन विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। रणजीत सागर बांध परियोजना के मुख्य अभियंता एसके सलूजा का कहना है कि कोराना महामारी के चलते बांध निर्माण कार्य कुछ समय के लिए बंद रहा, लेकिन अब सरकार के निर्देश पर इसे चालू करवा दिया गया है। तय समयावधि में बैराज का निर्माण कार्य पूरा करने को हम सभी प्रतिबद्ध हैं।

चार दशक पुरानी परियोजना

इस परियोजना के बारे में प्रस्‍ताव 41 वर्ष पूर्व 1979 में किया गया था। पंजाब सरकार ने जिला कठुआ के साथ लगती थीन सीमा पर रावी दरिया में रणजीत सागर झील को इसमें शामिल करने का प्रस्‍ताव दिया था। इसके  बदले में जम्मू-कश्मीर को 1150 क्यूसिक पानी व परियोजना में उत्पन्न होने वाली बिजली का 20 फीसद देने पर समझौता किया गया। जिस भूमि पर रणजीत सागर बांध का निर्माण होना था, वहां की 65 प्रतिशत भूमि जम्मू-कश्मीर की थी। पंजाब ने इसके बदले में जम्मू-कश्मीर को शाहपुर कंडी बैराज के निर्माण के बाद 1150 क्यूसिक पानी देने के लिए लिखित समझौता किया।

यह होगा फायदा

 - इस परियोजना के जरिए पाकिस्तान जाने वाले रावी नदी के पानी को नियंत्रित किया जा सकेगा।

- अभी पाकिस्तान की तरफ पानी चला रहा है, लेकिन डैम निर्माण के बाद पाक की तरफ पानी का बहाव कम हो जाएगा।

 - डैम में 206 मेगावाट के छोटे पावर प्लांट लगने हैं। इससे मिलने वाली बिजली से उद्योगों व किसानों को फायदा होगा।

 - डैम बनने से सालाना 852.73 करोड़ रुपये का सिंचाई और बिजली का लाभ होगा।

 - डैम के पानी से पंजाब व जम्मू-कश्मीर के खेत लहलहाएंगे। किसानों की सिंचाई जरूरतें पूरी होंगी।

 - पंजाब-हरियाणा के लाखों किसानों की किस्मत बदलेगी। कंडी क्षेत्र में हरियाली होगी।

  वर्ष 1979 से अब तक का सफर

- परियोजना की कल्पना वर्ष 1979 में की गई थी। पंजाब सरकार ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के साथ लगती सीमा पर रावी दरिया में रणजीत सागर झील को शामिल करने के बदले में जम्मू-कश्मीर को 1150 क्यूसिक पानी व प्रोजेक्ट में उत्पन्न होने वाली बिजली का 20 फीसद देने पर समझौता किया।

 - जिस जगह पर रणजीत सागर बांध का निर्माण होना था, वहां की 65 प्रतिशत भूमि जम्मू-कश्मीर की थी। पंजाब ने जम्मू-कश्मीर को शाहपुर कंडी बैराज के निर्माण के लिए लिखित समझौता किया।

 - जम्मू-कश्मीर सरकार ने समझौते के आधार पर जम्मू संभाग के एक बड़े सूखे कंडी क्षेत्र को पानी देने के लिए रावी तवी इरीगेशन प्रोजेक्ट का निर्माण भी किया। इसके अलावा बसंतपुर कठुआ से लेकर विजयपुर तक 84 किलोमीटर लंबी नहर भी बनाई गई। 

- नहर का डिजाइन 1150 क्यूसिक पानी की क्षमता के अनुसार ही किया गया, लेकिन पंजाब ने वर्ष 2000 में रणजीत सागर बांध का निर्माण पूरा होने के बाद शाहपुर कंडी बैराज का निर्माण ठंडे बस्ते में डाल दिया। शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट भी जम्मू कश्मीर की 80 प्रतिशत भूमि पर होना है।

- अब वर्षों बाद शाहपुर कंडी डैम का युद्धस्तर पर काम शुरू हो पाया है। पंजाब सरकार और केंद्र ने इस परियोजना को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

- लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया था। 30 अप्रैल को दोबारा बैराज का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसके बाद से तेजी से इस पर कार्य चल रहा है।

 

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