जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने 'स्मार्ट गांव' मुहिम को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत 384.40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्मार्ट गांव के तहत हर विधायक को पांच करोड़ रुपये की ग्रांट दी जाएगी। हालांकि, विधायक इसे काफी कम मान रहे हैं। इस पर सरकार ने वित्तीय स्थिति का हवाला देकर मामला शांत कर दिया।

यह मुहिम इस पक्ष पर आधारित होगी कि हर गांव बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण आदि क्षेत्र में तरक्की करे। स्मार्ट गांव मुहिम के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों को दो हिस्सों में बांटा गया है। इनमें जरूरी और इच्छुक काम रखे गए हैं। इस स्कीम के अंतर्गत ब्लॉक विकास और पंचायत अफसर से संबंधित विभागों के कार्यों के प्रस्ताव डिप्टी कमिश्नर हासिल करेंगे।

डिप्टी कमिश्नर के नेतृत्व वाली कमेटी की ओर से 25 लाख रुपये तक के व्यक्तिगत कार्यों को मंजूरी दी जाएगी। एडीसी (विकास) इस कमेटी के मेंबर सचिव होंगे। इस कमेटी में शामिल बाकी सदस्यों में जिला विकास और पंचायत अफसर, डिप्टी चीफ एग्जेक्टिव अफसर, जिला परिषद और कार्यकारी इंजीनियर (पंचायती राज) होंगे।

व्यक्तिगत कार्य 25 लाख रुपये से अधिक कीमत के होने की सूरत में संयुक्त विकास कमिश्नर और निगरान इंजीनियर (पीआरसी) एसएएस नगर क्रमवार चेयरमैन व मेंबर सेक्रेटरी के तौर पर आधारित राज्यस्तरीय कमेटी मंजूरी देगी। इस कमेटी में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के डायरेक्टर मुख्य इंजीनियर पंचायती राज और डीसीएफए मेंबर होंगे।

298 करोड़ से होगा शहरी पर्यावरण में सुधार

मंत्रिमंडल ने शहरी पर्यावरण सुधार प्रोग्राम (यूईआइपी) के अंतर्गत बुनियादी ढांचे के विकास के लिए शहरी स्थानीय इकाइयों को 298.75 करोड़ रुपये के फंड जारी करने के लिए स्थानीय निकाय विभाग के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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