-केंद्रीय मंत्री पासवान ने कैप्टन को पत्र लिख कर दिया जवाब

-जेटली ने मनप्रीत को बुलाया, पंजाब सरकार की चिंता बढ़ी

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राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़: फूडग्रेन के 31000 करोड़ रुपये की माफी को लेकर केंद्रीय खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राम बिलास पासवान ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को साफ इन्कार कर दिया है। इससे पंजाब सरकार के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

इस पत्र को लेकर वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने दो दिन पहले केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के साथ मीटिंग की थी। पता चला है कि जेटली ने मनप्रीत बादल को दस दिन बाद फिर से बुलाया है और आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार इस मामले में झा कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार काम करेगी। काबिले गौर है कि राम विलास पासवान ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि केंद्रीय कैबिनेट ने साल 2014-15 तक के फूड अकाउंट में आउटस्टैंडिंग के रूप में खड़े 12 हजार करोड़ रुपये के मूल पर लगे 18 हजार करोड़ रुपये को कर्ज में बदलने को मंजूरी दी थी। यह राशि राज्य सरकार की ओर से जीडीपी के अनुसार ली जाने वाली 3 फीसद कर्ज राशि से बाहर रखकर इसे विशेष टर्म लोन में बदला गया है। पंजाब फूड अकाउंट सिस्टम में फेल

पासवान ने पत्र में लिखा है कि केंद्रीय सेक्रेटरी खर्चा के साथ फूड एंड सप्लाई विभाग की मीटिंग में भी इस मुद्दे पर विचार किया गया है और पाया है कि राज्य सरकार फूड अकाउंट सिस्टम के ऑपरेशन में फेल हुई है। इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कैश क्रेडिट लिमिट की आउटस्टैडिंग को कर्ज में बदलना सही फैसला है और इस मुद्दे को यही खत्म समझा जाए। पूर्व सरकार ने किया गलत फैसला: मनप्रीत

पासवान के इस पत्र से राज्य सरकार में खलबली मच गई है। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने अरुण जेटली के साथ मीटिंग करके यह मुद्दा फिर से उठाया और कहा कि पूर्व सरकार यह गलत फैसला करके गई है। राज्य सरकार पर इस तरह का भार डालना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ज्वाइंट सेक्रेटरी झा की अगुवाई में कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट दी हुई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 12 हजार करोड़ रुपए की मूल राशि पर लिए गए 18 हजार करोड़ रुपये को तीन हिस्सों में बांटना चाहिए। 12 हजार करोड़ की राहत देने की सहमति दी

मनप्रीत के अनुसार एक-एक तिहाई हिस्सा राज्य सरकार, केंद्र सरकार और बैंकों को वहन करना चाहिए। उन्होंने यह भी दलील दी कि जब इस अकाउंट को कर्ज में बदला गया तब भी केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को ब्याज में 12 हजार करोड़ रुपये की राहत देने की सहमति दी थी, लेकिन बाद में इस केस को बंद ही कर दिया। उन्होंने इसी आधार पर अरुण जेटली से राहत की मांग की है। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने अरुण जेटली के साथ मीटिंग की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने जेटली के साथ हुई मीटिंग के बारे में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी जानकारी दे दी है।

Posted By: Jagran