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-शाहकोट विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस में बगावत

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-राकेश पांडे, रणदीप नाभा और अमरीक ढिल्लों ने जाहिर की नाराजगी

-मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठता को नजरंदाज करने का लगाया आरोप

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कैलाश नाथ, चंडीगढ़: कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी में उठी बगावत अभी शांत भी नहीं हुई थी कि शाहकोट विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस के तीन वरिष्ठ विधायकों ने सरकार की परेशानी और बढ़ा दी है। लुधियाना नॉर्थ के विधायक राकेश पांडे, फतेहगढ़ साहिब जिले की अमलोह सीट के विधायक रणदीप सिंह नाभा और लुधियाना जिले की समराला सीट से विधायक अमरीक सिंह ढिल्लों ने विधानसभा की कमेटियों से इस्तीफा दे दिया है। तीनों विधायकों ने सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा विधानसभा के स्पीकर राणा कंवरपाल सिंह केपी को सौंप दिया। विधायकों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व पार्टी हाईकमान पर उनकी वरिष्ठता को नजरंदाज करने आरोप लगाया है। विधानसभा कमेटियों से विधायकों के इस्तीफे का शाहकोट विधानसभा उपचुनाव पर भी असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि 7 मई को घोषित की गई विधानसभा की कमेटियों में राकेश पांडे को सरकारी कारोबार कमेटी का चेयरमैन और अमरीक सिंह ढिल्लों को लाइब्रेरी कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था, जबकि रणदीप सिंह नाभा इन दोनों कमेटियों में सदस्य बनाए गए थे। पार्टी ने नजरंदाज किया: राकेश पांडे

पार्टी ने मेरी वरिष्ठता को सिरे से नजरंदाज किया। इस स्थिति में विधानसभा की कमेटी का चेयरमैन रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। मैं मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, ब्रह्म मोहिंदरा के बाद सदन में ऐसा विधायक हूं जो 1999 का उपचुनाव और पांच विस चुनाव जीत चुका है। छह जीत के बावजूद पार्टी ने मेरी वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा।

-राकेश पांडे, विधायक, लुधियाना नॉर्थ

-राकेश पांडे एक उपचुनाव के अलावा 1992, 1997, 2002, 2012 और 2017 का विस चुनाव जीत चुके हैं।

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वफादारी का मूल्य नहीं डाला: ढिल्लों

चार बार विधानसभा चुनाव जीतने के बावजूद पार्टी ने मेरी वफादारी का मूल्य नहीं डाला। इसलिए विधानसभा की कमेटी से इस्तीफा दिया। मैं मंगलवार को शाहकोट में जाऊंगा और पार्टी के लिए प्रचार करूंगा। पार्टी ने वरिष्ठता का ध्यान पार्टी ने नहीं रखा, तो चेयरमैनशिप लेने में मेरी कोई रुचि नहीं है।

-अमरीक सिंह ढिल्लों, विधायक, समराला

-अमरीक सिंह ढिल्लों 1997, 2002, 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।

ऐसे विधायकों को मंत्री बनाया, जो पहले दूसरी पार्टी में थे: नाभा

क्या मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को नहीं दिख रहा है कि पार्टी में क्या चल रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसियों को नजरंदाज किया जा रहा है। कई ऐसे विधायकों को मंत्री बनाया गया, जो चुनाव से पहले पार्टी में आए या कुछ समय पहले दूसरी पार्टी से थे। इसलिए कमेटी में रहने का कोई औचित्य नहीं है।

-रणदीप सिंह नाभा, विधायक, अमलोह

-रणदीप सिंह नाभा 2002 का चुनाव नाभा से जीते थे। 2007 में नाभा सीट रिजर्व होने के बाद से वह अमलोह से लगातार जीत रहे हैं। यह है नाराजगी की वजह

चुनाव से पहले मनप्रीत बादल, नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस पार्टी में आए और दोनों को ही पार्टी ने मंत्री बनाया। नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी को वेयरहाउस कॉर्पोरेशन का चेयरपर्सन बनाया गया है। वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी 2007 में चमकौर साहिब से आजाद जीते थे। वह बाद में कांग्रेस में आ गए थे। कांग्रेस के टिकट पर 2012 और 2017 का चुनाव जीते। अब मंत्री हैं। ओबीसी व एससी श्रेणी के विधायक भी नाराज

पिछले माह कैबिनेट विस्तार के बाद से ही पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर सामने आ गए थे। ओबीसी व एससी समुदाय को प्रतिनिधित्व न दिए जाने को लेकर अमरगढ़ के विधायक सुरजीत सिंह धीमान और टांडा उड़मुड़ के विधायक संगत सिंह गिलजियां ने पार्टी के पदों से इस्तीफा दे दिया था। एसएसी समुदाय को नजरंदाज किए जाने के कारण राजकुमार वेरका नाराज हो गए थे। मामला सुलझा लेंगे: राणा केपी

स्पीकर राणा केपी ने कहा कि उन्हें तीनों विधायकों ने कमेटियों से संबंधित इस्तीफा सौंप दिया है। वह इस मामले पर सीएम से बात करेंगे। मामले को सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने इसे बहुत बहुत बड़ा मामला नहीं बताया।

Posted By: Jagran

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