जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। नगर निगम चुनाव से पहले प्रशासन द्वारा चार्ज किए जा रहे अन-अर्नड प्रॉफिट का मामला गरमा गया है। सोसायटी के लोगों ने यह मामला प्रशासन के समक्ष उठाया गया है। असल में यह अन-अर्नड प्रॉफिट शहर के व्यापारियों और निजी सोसायटी के फ्लैट में रहने वाले रेजिडेंट्स से लिया जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता एवं उद्योग व्यापार मंडल ने भी यह मामला प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित के समक्ष उठाया है। अन-अर्नड प्रॉफिट उन प्रापर्टी पर चार्ज होता है जो प्रापर्टी प्रशासन की ओर से शहरवासियों को अलॉट की गई है। जबकि प्रशासन ने दो साल पहले रेजिडेंशियल प्रापर्टी से अन-अर्नड प्रॉफिट चार्ज करना बंद कर दिया था। ऐसे में यह सिर्फ कमर्शियल और निजी सेासायटियों से वसूला जा रहा है। 

शहर के दक्षिणी सेक्टर में 130 निजी सोसायटियां हैं जहां पर हजारों फ्लैट हैं। चंडीगढ़ में सेक्टर-48 से 51 तक 108 ग्रुप हाउसिंग सोसायटीज हैं। यहां लगभग 13000 परिवार रहते हैं। जबकि नीलामी से खरीदी गई प्रापर्टी को बेचने पर अन-अर्नड प्रॉफिट चार्ज नहीं होता है। इन सोसायटियों में हजारों लोग रहते हैं। नगर निगम चुनाव के दो वार्ड इस सोसायटियों के पड़ते हैं। सोसायटी के फ्लैट धारकों का कहना है कि जो दल उनका यह मामला सुझाएगा वोट उसे ही मिलेगा।

क्या है अन-अर्नड प्रॉफिट

जब अलॉट हुई प्रापर्टी को उसका मालिक किसी और को बेचता है तो रजिस्ट्री के समय वर्तमान प्रापर्टी के वेल्यू का एक तिहाई अन-अर्नड प्रॉफिट का शुल्क प्रशासन चार्ज किया जाता है। जबकि लोगों का यह भी कहना है कि अगर अन-अर्नड प्रॉफिट लेना ही है तो अलॉटमेंट वेल्यू का लिया जाना चाहिए। शहर में 50 फीसद दुकानें और शोरूम ऐसे हैं जो कि प्रशासन की ओर से अलॉट किए गए हैं। जबकि बाकी कमर्शियल प्रापर्टी नीलामी द्वारा मालिकों ने खरीदी है। नीलाम प्रापर्टी पर अन-अर्नड प्रॉफिट चार्ज नहीं किया जाता है।

सलाहकार को सौंपा गया ज्ञापन

कोपरेटिव सोसाइटी वेलफेयर काउंसिल के प्रतिनिधि सोमवार को सलाहकार धर्म पाल को मिले और सोसायटियों में आ रही दिक्कतों को लेकर ज्ञापन सौंपा। उन कहा गया है कि निवासियों ने कोआपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाईटिज बना कर चंडीगढ़ प्रशासन से रियायती कीमत पर फ्लैट बनाने के लिए प्लाट लिया था। जिसका सभी फ्लैट धारकों से राशि ली गई। लेकिन अब प्रशासन की ओर से फ्लैट धारकों से अनर्जित लाभ (अन-अर्नड प्रॉफिट) मांगा जा रहा है जो 9 से 13 लाख रुपये तक बनता है। यह राशि काफी ज्यादा है।इसलिए इसे खत्म किया जाए। इस मौके पर आम आदमी पार्टी के उपाध्यक्ष संदीप भारद्वाज भी मौजूद रहे। भारद्वाज का कहना है कि इस मामले को प्रशासन को सुलझाना चाहिए। कई साल पहले जब प्रशासन प्रापर्टी की पूरी रकम ले चुका है तो फिर यह प्रॉफिट क्यों चार्ज किया जा रहा है।

Edited By: Ankesh Thakur