डॉ. सुमित सिंह श्योराण , चंडीगढ़

शहर की बेटी रशनप्रीत कौर महिला हॉकी टीम की नई सनसनी बन चुकी हैं। देश की जूनियर महिला हॉकी टीम में चयन के तत्काल बाद आस्ट्रेलिया में हुए पहले इंटरनेशनल मुकाबले में जीत के साथ उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की है। उन्होंने घर लौटकर परिजनों के साथ जीत की खुशी सेलिब्रेट की। रशनप्रीत कौर ने 15 साल की उम्र में हॉकी खेलना शुरू किया था। अब वह इंडिया की जूनियर हॉकी टीम की गोलकीपर हैं।

परिवार के साथ मंगलवार को सेक्टर-9 स्थित दैनिक जागरण दफ्तर पहुंचीं रशनप्रीत कौर ने बताया कि उन्हें परिवार का बखूबी साथ मिला। इसी वजह से आज वह इस मुकाम तक पहुंची हैं। वह पंजाब के रोपड़ की मूल निवासी हैं।

चंडीगढ़ के सेक्टर-22 निवासी रशनप्रीत कौर ने बताया कि वह पंजाब से इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला गोलकीपर हैं। वह 3 से 8 दिसंबर तक आस्ट्रेलिया में हुई तीन देशों के टूर्नामेंट का खिताब जीत कर लौटी हैं। भारतीय टीम ने आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ हुए सभी मैचों में जीत हासिल कर यह टूर्नामेंट जीता। परिवार के साथ दैनिक जागरण पहुंची रशनप्रीत कौर ने हॉकी टीम में एंट्री से पूर्व के अपने संघर्ष की पूरी कहानी बयां की। वह इन दिनों तरणतारण एकेडमी में प्रेक्टिस करती हैं। परिवार साथ दे तो बेटियां भी कम नहीं ..

दैनिक जागरण से बातचीत में रशनप्रीत कौर ने कहा कि समाज में बेटियों को लेकर सोच बदल रही है। उनके परिवार में कोई खिलाड़ी नहीं है, लेकिन जब उनका चयन स्कूल की टीम में हुआ तो पूरे परिवार ने उनका साथ दिया। अपनी सफलता के लिए वह अपनी मां कमलजीत कौर, कोच शरणजीत सिंह और फिटनेस ट्रेनर दविद्र सिंह को देती हैं। कौर ने कहा कि परिवार के सहयोग के बिना उनका यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि पिता सतिदर सिंह, नाना सुरेंद्र सिंह,नानी हरबंस कौर और बहन अक्षिता ने भी काफी मोटिवेट किया। 15 साल की उम्र में उठाई हॉकी, अब हैं इंडिया की जूनियर हॉकी टीम की गोलकीपर

रशनप्रीत कौर ने हॉकी की शुरुआत 15 साल की उम्र में कुराली स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल से की। स्कूल की टीम में सिर्फ उनकी फिजिक को देखकर चयन हो गया। इसके बाद तो उन्होंने कभी मुड़कर नहीं देखा। रशनप्रीत अब पंजाब टीम की ओर से खेलती हैं। आस्ट्रेलिया में हुए टूर्नामेंट में पंजाब से सिर्फ दो खिलाड़ियों का चयन हुआ था। इसमें रशनप्रीत अकेली गोलकीपर हैं। कोच ने मेरी फिटनेस के देखते हुए गोलकीपर तौर पर चुना। खेलो इंडिया में भी किया था कमाल

फरवरी 2018 में पुणे में खेलो इंडिया प्रोग्राम में भी इनका चयन हुआ था। वह इंडियन हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पुनिया को रोल मॉडल मानती हैं। कौर पढ़ाई में भी होशियार हैं। उन्होंने 10वीं में 84और 12वीं क्लास में 80 फीसद अंक हासिल किए। खाली समय में इन्हें किताबें पढ़ना अच्छा लगता है। 2024 का ओलंपिक है लक्ष्य

रशनप्रीत ने कहा कि पहले ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जीत के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। इनका लक्ष्य अब भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए 2024 के ओलंपिक में खेलना है। यहां तक पहुंचने के लिए रशनप्रीत प्रतिदिन सुबह शाम 6 घंटे कड़ी मेहनत करती हैं। उन्होंने माना कि हॉकी टीम में काफी अच्छी खिलाड़ी हैं, जिससे कंपीटीशन काफी बढ़ गया है। पंजाब सरकार से काफी उम्मीदें

स्टेट लेवल पर पंजाब का प्रतिनिधित्व करने वाली रशनप्रीत ने कहा कि पंजाब सरकार खिलाड़ियों को काफी प्रोत्साहित करती है। वह भी पंजाब पुलिस में पुलिस अधिकारी बनना चाहती हैं। आने वाले समय में जापान में होने वाले एशिया कप और अप्रैल 2020 में होने वाले व‌र्ल्ड कप की तैयारी में जुटी हैं। लक्ष्य पर नजर और कड़ी मेहनत से कोई भी मंजिल पाना असंभव नहीं है। पहले ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जीत से मेरा कॉन्फीडेंस काफी बढ़ा है। मुझे विश्वास है कि मैं जल्द ही भारतीय सीनियर हॉकी टीम का हिस्सा बन देश के लिए खेलूंगी। मेरे परिवार की तरह सभी पेरेंट्स बेटियों का हौसला बढ़ाएं तो वह भी कुछ अलग कर सकती हैं।

- रशनप्रीत कौर, गोलकीपर नेशनल जूनियर हॉकी टीम इंडिया।

Posted By: Jagran

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