बठिंडा [साहिल गर्ग]। पंजाब सरकार की कर्ज माफी योजना भी किसानों का दुख-दर्द दूर नहीं कर पा रही है। जिले के गांव संदोहा के दो एकड़ जमीन के मालिक किसान नायब सिंह व मूर्ति कौर ने पोल्ट्री फार्म के लिए कोऑपरेटिव बैंक शेखपुरा से ढ़ाई लाख रुपये का कर्ज लिया था। पति की मौत के बाद बैंक का कर्ज उतारने में नाकाम मूर्ति कौर ने सरकार अब अपनी किडनी बेचने का फैसला किया है। उनका कहना है कि अगर सरकार कर्ज माफ नहीं कर सकती तो किडनी बेचने की इजाजत दे। वर्तमान में वह आंगनबाड़़ी़ हेल्पर के तौर पर तीन हजार रुपये मानभत्ते से अपने परिवार का गुजारा कर रही हैं।

गांव संदोहा के दो एकड़ जमीन के मालिक किसान नायब सिंह व मूर्ति कौर ने पोल्ट्री फार्म के लिए कोऑपरेटिव बैंक शेखपुरा से ढ़ाई लाख रुपए का कर्ज लिया था। मूर्ति कौर ने बताया कि साल 2011 में अचानक पित नायब सिंह बीमार रहने लगे। चेकअप करवाया तो डॉक्टरों ने उन्हें कैंसर की बीमारी बताई। उसने अपने पति को बचाने के लिए ओर कर्ज लेकर फरीदकोट से इलाज करवाया। बावजूद इसके साल 2013 में उसके पति की मौत हो गई।

इधर, बीमारी पर खर्च के कारण बैंक की किश्तें नहीं भरी जा सकीं। इसके बाद बैंक की ब्रांच के मैनेजर ने उनसे लिया खाली चेक लेकर जनवरी 2016 में बैंक में लगा दिया। चेक बाउंस होने के बाद बैंक अधिकारियों ने उसके खिलाफ तलवंडी साबो की अदालत में केस दायर कर दिया। मगर उसके पास पैसे जमा करवाने का कोई साधन नहीं है। इस पर तलवंडी साबो की अदालत ने 30 अक्टूबर 2018 को उन्हें दो साल की कैद व 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मूर्ति ने जुर्माना अदा करने के बाद जिला अदालत बठिंडा में अपील दायर की। अब केस का फैसला 23 सितंबर, 2019 को होने की संभावना है।

कर्ज माफ नहीं कर सकती सरकार तो किडने बेचने की इजाजत दे

मूर्ति कौर का कहना है उसने भी पहले अन्य किसानों की तरह खुदकुशी करने की सोची थी। मगर बाद में उसने अपनी किडनी बेचने का फैसला कर लिया। उन्होंने बताया कि अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए वह खुदकुशी की जगह किडनी बेच कर बैंक का कर्ज वापस करेगी। महिला का कहना है कि पंजाब सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। मगर उसका कर्ज माफ नहीं किया गया।

इस कारण कर्ज ढाई लाख से बढ़कर 5.95 लाख हो गया है। उन्होंने कहा कि कई अमीर लोग किडनी खराब होने के कारण मर रहे हैं, इस कारण उन्होंने किडनी बेचने का फैसला किया। इससे कर्ज भी उतर जाएगा और बेटी की शादी भी हो जाएगी। मूर्ति कौर ने कहा अगर सरकार ने उन्हें किडनी बेचने की मंजूरी नहीं दी तो वह अपने वकील से सलाह करके अदालत से किडनी बेचने की मंजूरी मांगेंगी।

23 सितंबर को होगा केस का फैसला

मूर्ति कौर ने बताया कि उन्हें आंगनबाड़ी हेल्पर के तौर पर तीन हजार रुपये मिलते हैं। इसी से उनके परिवार का खर्च चलता है। उसके दो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हैं जबकि केस लडऩे के लिए भी पैसों की जरूरत होती है। उन्हें हर तारीख पर अदालत में पेश होने के लिए बठिंडा आना पड़ता है। उनके केस का फैसला जिला अदालत 23 सितंबर को सुना सकती है। उन्हें यही चिंता सता रही है कि अगर अदालत उन्हें जेल भेज देती है तो उनके बच्चों का क्या होगा।

अदालत में कहा, मेरे पास कुछ नहीं

तलवंडी साबो की अदालत के सामने पीडि़त महिला मूर्ति कौर ने कहा कि उसके पास पांच कनाल जमीन बची है, जिसके अलावा उसके पास कुछ नहीं है। दो बच्चों की पढ़ाई व परवरिश वह मुश्किल से कर रही है। महिला ने अदालत में कहा कि वह कर्ज वापस करना चाहती है, मगर किस प्रकार इतना पैसा वापिस करे यह कुछ नहीं समझ आ रहा है और न ही उसके पास आमदन का कोई साधन है। मूर्ति कौर ने कहा कि बैंक प्रबंधकों ने कर्ज के बदले उन्हें बहुत जलील किया है। पति की मौत के एक साल बाद भी उनकी फोटो बैंक में लगी हुई है। कर्ज लेने के समय गवाही देने वाले किसानों को भी बुरा-भला बोला गया है।

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!