साहिल गर्ग, बठिडा

केंद्र सरकार की योजना स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर को खुले में शौच मुक्त करने के लिए अब जल सप्लाई व सेनिटेशन विभाग ने लोगों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। इसके तहत विभाग द्वारा उन 1300 लोगों को नोटिस भेजा, जिन्होंने शौचालय बनाने के लिए पैसे तो ले लिए, मगर बनाया नहीं। नोटिस के बाद भी अगर यह लोग निर्माण शुरू नहीं करते तो उनको समन भेजा जाएगा। यह वह लोग हैं, जिन्होंने पहली किश्त लेने के बाद ही निर्माण शुरू नहीं किया। जबकि जिले में इस योजना के तहत 42 करोड़ का फंड जारी हुआ है, जिसको विभाग द्वारा लोगों में बांटने का दावा किया गया है।

जिले में 7215 घर तो ऐसे हैं, जिनमें शौचालयों का निर्माण ही शुरू नहीं हुआ। जिले में सेनिटेशन विभाग की ओर से करवाए सर्वे के दौरान 35,042 ऐसे घरों को शामिल किया था, जिनमें शौचालय नहीं बने थे। इसमें से 31 अक्टूबर 2017 तक 33,537 का डाटा ही सेनिटेशन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड हुआ था, जिसके चलते इनको ही मंजूरी मिली। लेकिन इसमें से भी विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी तक 26,322 घरों ने शौचालय का निर्माण पूरा कर लिया है। वहीं 3246 घरों में इसका निर्माण चल रहा है।

बठिडा ब्लॉक : पढ़ने में आगे, निर्माण में सबसे पीछे

जिले में शौचालयों का निर्माण करने में बठिडा ब्लॉक जो शहरी एरिया का सबसे पढ़ा लिखा माना जाता है, इस मामले में सबसे पीछे है। यहां पर 7586 में से 7079 को मंजूरी मिली थी, जिसमें से 3419 ने तो काम ही नहीं शुरू किया। इसी प्रकार भगता भाईका ब्लॉक में 1884 में से 1860 को मंजूरी मिली तो 83 ने काम शुरू नहीं किया। मौड़ में 5645 में से 5636 को मंजूरी मिली और 878 ने काम नहीं शुरू किया। नथाना में 3821 में से 3782 को मंजूरी तो मिली, लेकिन 812 घर अभी भी ऐसे हैं, जहां पर काम नहीं शुरू हुआ। जबकि रामपुरा ब्लॉक से 4378 में से 4220 को परमिशन दी गई, जिसमें से 90 घरों में निर्माण शुरू होना बाकी है। इसी प्रकार संगत ब्लॉक के 5030 में से 4390 घर पास हुए तो 1516 में काम नहीं शुरू हो पाया और तलवंडी साबो ब्लॉक के 5310 में से 5174 पास हुए, 440 में काम नहीं शुरू हो पाया।

ऐसे मिलते हैं पैसे

शौचालयों का निर्माण करने के लिए सरकार 15 हजार रुपये देती हैं। पहले पांच हजार रुपये घर में गड्ढा उखाड़ने के बाद की जाने वाली तैयारी पर मिलते है। अगले पांच हजार आधा निर्माण कार्य पूरा होने पर मिलते हैं। इसके अलावा अंतिम के पांच हजार शौचालय का निर्माण कंपलीट होने के बाद दिए जाते हैं।

ऐसे होते हैं खुले में शौचमुक्त

मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एक गांव आमसभा की बैठक में पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए खुद को शौचमुक्त घोषित करता है। गांव के नागरिक इस बात की पुष्टि करते हैं कि सभी परिवार शौचालय का इस्तेमाल करते हैं। अगला चरण ओडीएफ घोषणा के सत्यापन की प्रक्रिया है। घोषणा के 90 दिन में यह होता है।

लोगों ने कहा, नहीं मिले पैसे

शहर की धोबियाना बस्ती के दौरे के दौरान पता लगा कि यहां पर लोगों को शौचालय बनाने के लिए पूरे पैसे ही नहीं मिले। कई घर तो ऐसे थे, जिनको अप्लाई करने के बाद भी कोई सहायता नहीं मिली तो उन्होंने अपने लेवल पर ही काम शुरू कर दिया। इसको लेकर कमलेश देवी ने बताया कि सिर्फ दो हजार रुपये मिले। इसके बाद कोई पैसा नहीं मिला और उनको हर बार शौचालय कच्चा होने का तर्क दे दिया जाता। वहीं राजकुमारी ने बताया कि उन्होंने घर में गड्ढा तो खोद लिया, लेकिन जब अप्लाई किया तो सिर्फ तस्वीरें खींच ली गई और पैसा नहीं दिया। इसी प्रकार एरिया की कुलविदर कौर, आशा रानी, पूनम ने बताया कि कोई पैसा नहीं मिला।

केंद्र सरकार की योजना के तहत जिन घरों में शौचालय नहीं है, उनका सर्वे कर काम शुरू करवाया गया। इसमें से बहुत से घरों में काम तो पूरा हो गया है। लेकिन जिन्होंने काम शुरू नहीं किया, उनको नोटिस जारी करने के अलावा डीसी बठिडा को भी बताया है। जो भी फंड आया है, वह सारा लोगों के बीच बांट दिया है। अगर किसी को फंड नहीं मिला तो वह जांच करवाएंगे।

अमनदीप सिंह बराड़, एसडीओ कम नोडल अफसर शौचमुक्त अभियान, वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन, बठिडा।

Posted By: Jagran

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