सुभाष चंद्र, बठिडा : प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में शहर के अधर में लटके पड़े राइजिग मेन का दोबारा निर्माण कार्य आरंभ करने को लेकर पिछले दिनों शुरू किया जमीन की निशानदेही का कार्य मुकम्मल कर लिया गया है। अब इसका निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने को लेकर डीसी बी श्रीनिवासन की ओर से सोमवार को नगर निगम एवं सीवरेज बोर्ड के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। इस बैठक के दौरान ही राइजिग मेन का रुका पड़ा निर्माण कार्य कब से शुरू किया जाना है के बारे में निर्णय लिया जाएगा। किसानों को भरोसे में लेकर

पूरा किया निशानदेही कार्य 18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस राइजिग मेन का निर्माण पिछले करीब एक साल से किसानों के साथ बार बार जमीनी विवाद के चलते रुका पड़ा है। लेकिन बीती मानसून की बारिश में शहर के फिर से डूबने के बाद राज्य सरकार की ओर से दिए गए कड़े आदेश के बाद बीते सितंबर माह में प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्ती के साथ इसका निर्माण कार्य फिर से चालू करने की कोशिश की थी। लेकिन जमीन की दोबारा निशानदेही कर उनकी तसल्ली कराने और धान की फसल कटने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की किसानों की अपील के बाद अधिकारियों ने उनकी बात मान ली थी। अब बीते नवंबर माह में धान की फसल कटने के बाद जमीन की निशानदेही का कार्य शुरू किया गया। हालांकि इस निशानदेही दौरान भी किसानों की अधिकारियों के साथ काफी तल्खी भी हुई, लेकिन इसके बावजूद काम जारी रहा। आखिर अधिकारियों ने किसानों को उनकी एक इंच जमीन भी राइजिग मेन में न आने देने के भरोसे से निशानदेही का कार्य पूरा कर लिया गया। मानसून से पहले निर्माण मुकम्मल

करने का लक्ष्य

एसडीएम अमरिदर सिंह टिवाणा ने बताया कि निशानदेही का काम पूरा हो चुका है। अब वर्ष 2020 की मॉनसून से पहले-पहले राइजिग मेन को मुकम्मल कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नगर निगम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर किशोर बांसल ने बताया कि सोमवार को निर्माण कार्य शुरू करने को लेकर डीसी बी श्रीनिवासन ने बैठक बुलाई है। इस बैठक में निर्माण कब से शुरू करना है, इसका फैसला किया जाएगा। उम्मीद है जल्दी ही यह निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जलभराव से स्थायी मुक्ति

की उम्मीद की किरण

शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर लसाड़ा ड्रेन तक बनने वाले साढ़े 12 किलोमीटर 1200 एमएम राइजिग मेन का निर्माण कार्य वर्ष 2016 शुरू किया गया था। लेकिन किसानों के साथ जमीनी विवादों के चलते अभी तक सिर्फ 4.8 किलोमीटर का ही निर्माण हो पाया है। अब पिछले करीब एक साल से काम ठप पड़ा है। इसके मुकम्मल होने से शहर को जहां बारिशों के दिनों में जलभराव से स्थायी मुक्ति मिलने की उम्मीद है, वहीं सीवरेज की जलभराव की समस्या से भी छुटकारा मिलने की आशा है। शहर अर्से से सीवरेज और बारिश के जलभराव की समस्या से पीड़ित है। प्रत्येक मानसून में शहर के अनेक क्षेत्र पानी में डूब जाते हैं।

Posted By: Jagran

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