नगर निगम बठिंडा के पीआईओ पर सख्ती, बार-बार गैरहाजिरी पर शो-काज नोटिस
पंजाब राज्य सूचना आयोग ने बठिंडा नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को आरटीआई सुनवाई में बार-बार अनुपस्थित रहने पर शो-कॉज नोटिस जारी किया है।

PIO अनुपस्थिति पर पंजाब सूचना आयोग ने शो-कॉज नोटिस जारी किया। फाइल फोटो
HighLights
PIO अनुपस्थिति पर पंजाब सूचना आयोग ने शो-कॉज नोटिस जारी किया
अगली सुनवाई में गैरहाजिरी पर जमानती वारंट की सख्त चेतावनी
आरटीआई आवेदन में हैंडपंपों के खर्च की जानकारी दो साल से लंबित
जागरण संवाददाता, बठिंडा। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून की अनदेखी को लेकर नगर निगम बठिंडा के लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) पर पंजाब राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है।
आयोग की कमिश्नर पूजा गुप्ता द्वारा बार-बार सुनवाई से गैरहाजिर रहने के कारण संबंधित पीआईओ को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। साथ ही अगली सुनवाई में अनुपस्थित रहने पर जमानती वारंट जारी करने की चेतावनी भी दी गई है। मामला अपील केस नंबर 3734/2024 से जुड़ा है, जिसकी अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीआईओ को इस सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर नोटिस का लिखित जवाब देना होगा।
जानकारी अनुसार, इससे पहले भी 17 दिसंबर 2025 और 5 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान पीआईओ की गैरहाजिरी पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई थी और वारंट जारी करने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अधिकारी के रवैये में कोई सुधार नहीं आया, जिससे आयोग को इस बार सख्त कदम उठाना पड़ा।
यह पूरा मामला बठिंडा निवासी पंकज कुमार द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से शुरू हुआ था। उन्होंने 21 फरवरी 2024 को नगर निगम से शहर में लगे सरकारी नलों, हैंडपंपों की संख्या, नए लगाए गए उपकरणों और उनकी मरम्मत पर हुए सालाना खर्च की जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय में सूचना न मिलने पर उन्होंने 27 मार्च 2024 को पहली अपील दायर की, लेकिन वहां भी समाधान नहीं हुआ।
इसके बाद उन्होंने दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग में दायर की। इस मामले की पहली सुनवाई 3 सितंबर 2025 को हुई थी, जिसमें नगर निगम की ओर से पीआईओ की जगह एक क्लर्क पेश हुआ। दूसरी और तीसरी सुनवाई में तो निगम का कोई प्रतिनिधि ही उपस्थित नहीं हुआ, जिससे आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही माना। सूचना न मिलने के कारण अब तक दो साल से अधिक समय बीत चुका है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आवेदक का आरोप है कि मांगी गई जानकारी में गड़बड़ी या किसी प्रकार के वित्तीय अनियमितता की आशंका भी हो सकती है।
नगर निगम द्वारा 15 अप्रैल 2024 को जारी एक पत्र के अनुसार वर्ष 2016 से 2024 के बीच हैंडपंपों की मरम्मत पर लगभग 2.64 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। हालांकि, पूरी और स्पष्ट जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं करवाई गई है। इस मुद्दे पर आरटीआई कार्यकर्ता संजीव गोयल ने भी नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि निगम में सूचना का अधिकार कानून का खुला उल्लंघन हो रहा है। लोग आवेदन और फीस जमा करने के बावजूद महीनों और वर्षों तक जानकारी से वंचित रहते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि नगर निगम में सैकड़ों आरटीआई आवेदन और पहली अपील लंबित पड़ी हैं, जिनका अब तक निपटारा नहीं किया गया। इससे आम जनता में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि आगामी सुनवाई में नगर निगम के अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं और आयोग आगे क्या कार्रवाई करता है।
