जागरण संवाददाता, बठिडा : राज्य के निजी पेट्रोल पंपों से धरने उठाने के मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) ने बुधवार को स्थानीय टीचर्स होम में बैठक बुलाई, लेकिन बैठक में राज्य का अन्य कोई भी किसान संगठन शामिल नहीं हुआ। इस कारण पेट्रोल पंपों से धरने उठाने का किया जाने वाला निर्णय अधर में लटक कर रह गया है। बता दें कि निजी कंपनियों के पेट्रोल पंपों के डीलरों ने किसान संगठनों से गुहार लगाई थी कि किसानों के धरने के चलते उनका भारी नुकसान हो रहा है, जबकि संबंधित कंपनियों को इसका कोई नुकसान नहीं हो रहा है। यह पंप पंजाब के डीलर चला रहे हैं, न कि खुद कंपनियां। इससे जहां डीलरों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं इन पंपों पर काम करने वाले गरीब कारिदों को भी बेकार होकर घर पर बैठना पड़ रहा है। अगर धरने लगाने हैं तो जो पंप कंपनियां खुद चला रही हैं, उन पर लगाने चाहिए। उनकी इस गुहार के बाद पिछले सप्ताह भाकियू (एकता उग्राहां) और राज्य भर के पेट्रोल पंप डीलरों के बीच बैठक हुई थी, जिसमें भाकियू नेताओं ने आश्वासन दिया था कि 28 अक्टूबर को अन्य किसान संगठनों के साथ बैठक करके इस संबंध में निर्णय ले लिया जाएगा। किसान नेताओं ने पंप डीलरों के साथ सहमति जताई थी। इसके बाद ही भाकियू ने सभी किसान संगठनों की बुधवार को बैठक बुलाई थी। भाकियू एकता उग्राहां के प्रांतीय वरिष्ठ उप प्रधान झंडा सिंह जेठूके व जिला प्रधान शिगारा सिंह मान ने कहा कि अन्य किसान संगठन बैठक में शामिल नहीं हुए। क्यों नहीं शामिल हुए, यह तो वही बता सकते हैं, लेकिन उनके शामिल न होने से पंपों पर धरनों को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका है। कोई फैसला होने तक फिलहाल यह धरने उसी तरह से जारी रहेंगे।

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