जासं,, बठिडा: कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में चल रहे संघर्ष के दौरान मारे गए किसानों के पारिवारिक सदस्यों को अब पंजाब सरकार नौकरी देगी। इस संबंध में सरकार की ओर से सभी जिलों रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसके आधार पर बठिंडा जिले से 33 किसानों की रिपोर्ट पंजाब सरकार को भेजी गई है। अब इस पर आगे की कार्यवाही पूरी होने के बाद नौकरी दी जाएगी।

प्रशासन की ओर से जिन 33 किसानों की रिपोर्ट भेजी गई है, उसमें सबसे ज्यादा मरने वाले किसानों की गिनती मौड़ ब्लाक की है। यहां पर 13 किसानों की दिल्ली संघर्ष के दौरान मौत हुई है, जबकि बठिडा व तलवंडी साबो ब्लाक में 8-8 किसानों की मौत हुई है। रामपुरा में चार किसानों ने संघर्ष के दौरान दम तोड़ा। अब सरकार की ओर से आवेदकों को उनकी योग्यता के आधार पर दर्जा तीन व दर्जा चार की नौकरी दी जाएगी। नौकरी के लिए किसानों के परिवारों से उनके बेटे या बेटी के अलावा पत्नी, भतीजा, पौत्र व पौत्री ने अप्लाई किया है। हालांकि जिन किसानों की मौत हो चुकी है, उनमें से किसी भी किसान के आर्थिक हालात ठीक नहीं है। किसानों की ओर से कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में 26 नवंबर से संघर्ष किया जा रहा है। आवेदकों में सिर्फ पांच ही ग्रैजुएट या एमए प्रशासन की तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर जिनको नौकरी के लिए चुना गया है, उनमें से सिर्फ पांच आवेदक ही ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई कर चुके हैं। बाकी के सभी आवेदकों की पढ़ाई 12वीं से भी नीचे है। गांव नहियांवाला के मृतक किसान तेजा राम के बेटे मनीश कुमार ने बीटेक की है तो गांव सिधाना के मृतक किसान सुखविदर सिंह के बेटे ने बीसीए एमसीए की पढ़ाई की है। इसके अलावा गांव मंडीकलां के मृतक किसान कर्मजीत सिंह के बेटे कमलप्रीत सिंह ने बीए, गांव शेखू के मृतक किसान प्रितपाल सिंह की बहन अमृतपाल कौर ने बीए व गांव भागीवांदर के मृतक किसान हरजिदर सिंह की पत्नी मनप्रीत कौर ने एमए पंजाबी की पढ़ाई की है। बाकी आवेदकों में से 13 ने 12वीं, छह ने 10वीं, दो ने 9वीं, पांच ने 8वीं व एक ने 5वीं तक पढ़ाई की है। वहीं एक आवेदक अनपढ़ है।

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