संवाद सहयोगी, बरनाला : रेलवे स्टेशन बरनाला पर केंद्र के विरोध में किसानों द्वारा 21 दिसंबर से भूख हड़ताल शुरू की गई है, जिसको दो दिन शहीदी दिवस को लेकर स्थगित कर दिया था। लेकिन दूसरे पड़ाव में बुधवार फिर से भूख हड़ताल शुरू की गई। जहां भूख हड़ताल में बुजुर्ग व महिलाओं द्वारा हिस्सा लिया, वहीं अब युवा पीढी व बच्चे भी भूख हड़ताल में शामिल होने लगे है। रेलवे स्टेशन बरनाला पर गांव उप्पली निवासी 9 साल का एकम प्रीत सिंह भूख हड़ताल पर बैठा है। गौर हो कि खेलकूद की उम्र में बच्चे संघर्ष पर डटे है, जबकि दिन उनके खेलकूद व मस्ती के है। ऐसे में बच्चे संघर्ष की जानकारी अधूरी होने के बावजूद बुजुर्गो व अभिभावकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। वहीं 20 वर्षीय अमनदीप सिंह निवासी भूख हड़ताल पर बैठा है। अमनदीप सिंह ने कहा कि कृषि कानून रद्द करवाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार है। अगर किसान के पास जमीन नहीं रहेगी, तो किसान कैसे खुशहाल रहेगा।

किसान की मौत पर मुआवजा व सरकारी नौकरी ना मिलने पर बनाई संघर्ष की रणनीति

संवाद सहयोगी, बरनाला : भाकियू एकतां उगराहा के किसान नेता सुखदेव सिंह निवासी गुरम की मौत के तीन दिन बाद भी किसानो द्वारा पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। वहीं सिविल अस्पताल मोर्चरी समक्ष पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई है। भाकियू उगराहां द्वारा किसान की मौत मामले में जिला प्रशासन व सरकार द्वारा 10 लाख रुपया मुआवजा नहीं मिलने के कारण लकी कालोनी गली नंबर दो भाजपा जिला प्रधान के घर समक्ष बैठक की गई। जिसमें ब्लाक बरनाला प्रधान बलौर सिंह छन्ना के नेतृत्व ब्लाक धनौला प्रधान जरनैल सिंह बदरा के निर्देशा संघर्ष की रणनीति बनाई गई। जिसमें सैकड़ो किसान उपस्थित हुए व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई। बदरा ने कहा कि मुआवजा व सरकारी नौकरी को लेकर शुक्रवार को डीसी दफ्तर का घेराव किया जाएगा। अगर मुआवजा नौकरी न दी तो संघर्ष बड़ा किया जाएगा।

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