जागरण संवाददाता, अमृतसर

घर के आस-पास हो या फिर स्कूल जहां बच्चों को अपने साथ होने वाले गुड व बैड टच को अच्छी तरह से समझना चाहिए, ताकि उनसे होने वाले यौन शोषण को रोका जा सके। 'बाल यौन शोषण: आओ अब बात करें' के तहत बच्चों को यौन शोषण से बचाने के मकसद से दैनिक जागरण ने परवरिश केयर्स फाउंडेशन के सहयोग से जगत ज्योति पब्लिक स्कूल में दो दिवसीय वर्कशॉप के पहले दिन फाउंडेशन की तरफ से पहुंचे आदित्य नैय्यर ने बच्चों को संबोधित करते हुए गुड व बैड टच संबंधी अवगत करवाया। नैय्यर ने बच्चों को समझाया कि जब आप से कोई अजनबी व्यक्ति बुरी नीयत से हाथ लगाकर छूए, तो तुरंत आपको उसका विरोध करना चाहिए, ताकि उस व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले किया जा सके। उन्होंने कहा कि बच्चों जब भी आपसे कोई अजनबी व्यक्ति बुरी हरकत करे तो तुरंत शोर मचाना चाहिए, भाग जाना चाहिए, जो भी महिला या पुरुष आपके पास हो उससे मदद मांगनी चाहिए और अंत अपने माता-पिता के मोबाइल नंबर पर संपर्क करके मौके पर बुलाना चाहिए, ताकि होने वाले नुक्सान से बचा जा सके। नैय्यर द्वारा गुड व बैड टच संबंधी जानकारी हासिल करने के बाद सभी बच्चों ने आश्वासन दिया कि वे मिली जानकारी के तहत अपने जीवन में काम करेंगे। उस संबंधी अपने अध्यापकों व अभिभावकों को सूचित करने के साथ-साथ अपनी सहपाठियों को भी आगाह करने में अहम भूमिका निभाएंगे। नैय्यर ने कहा कि बाल यौन शोषण गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसकी अनदेखी करना उचित नहीं है और अब समय आ गया है, अभिभावक व अध्यापक उक्त मुद्दे पर गंभीर से विचार करें। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार से बच्चों के साथ होने वाले बाल यौन शोषण के विषय पर बच्चों को जागरूक किया जाना चाहिए, ताकि उनकी चुप्पी टूटे और समाज से बाल यौन शोषण जैसे गंभीर अपराध को कुछ हद तक रोका जा सके।

कोट.-कानून बनाकर उसे लागू भी करे सरकार

दैनिक जागरण व परवरिश केयर्स फाउंडेशन द्वारा बच्चों को जागरूक करना सराहनीय है, मगर सरकार को भी चाहिए बाल यौन शोषण के आरोपित को चौक में खड़ा करके लटका देना चाहिए। सरकार को कानून बनाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बनाए गए कानूनों को सख्ती से लागू भी करना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति भविष्य में गलती करने से पहले सौ बार सोचे,

सुमीत पुरी, डायरेक्टर

जगत ज्योति पब्लिक स्कूल, माहन ¨सह गेट।

कोट:

बच्चों, अध्यापकों व अभिभावकों को तोड़नी होगी झिझक

यह वर्कशॉप बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि अभिभावकों की झिझक तोड़ने में मददगार साबित होगी। बच्चों के सुरक्षित बचपन के लिए अभिभावकों को भी मुखर होना पड़ेगा। हम लोग बच्चों की समस्या को हल्के में ले लेते हैं, जो बाद में नासूर बन जाता है और अब ऐसा नहीं होगा। हम जानते सब हैं और समझते भी है, मगर अफसोस की बात है कि हम अमल नहीं करते पाते हैं।

रितु पुरी, ¨प्रसिपल,

जगत ज्योति पब्लिक स्कूल, माहन ¨सह ग ट।

Posted By: Jagran