जागरण संवाददाता, अमृतसर

मकबूल रोड स्थित 177.66 गज की प्राइम जगह का विवाद थमता दिखाई नहीं दे रहा है। नगर सुधार ट्रस्ट और पंजाब वक्फ बोर्ड के बीच मालिकों को लेकर विवाद चल रहा है। विडंबना तो यह है कि ट्रस्ट द्वारा कार्रवाई के लिए दर्जनों नोटिस जारी किए जाने के बावजूद न तो पुलिस प्रशासन उन्हें कार्रवाई के लिए फोर्स दे रहा है और पंजाब स्टेट पावर कापोरेशन उनके कहे मुताबिक बिजली के कनेक्शन ही काट रहा है। खास बात यह है कि डिप्टी कमिश्नर खुद ट्रस्ट के कार्यका?री चेयरमैन है और उसके बावजूद दूसरे विभागों के अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे।

कांग्रेस के पूर्व सचिव व प्रवक्ता मनदीप ¨सह मन्ना ने आरोप लगाया कि मकबूल रोड की करोड़ों की जगह पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ और सिर्फ नोटिस ही जारी किए जा रहे है। मई 2018 में उन्होंने मामले का खुलासा किया था, लेकिन इसे पहले चार दर्जन से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके थे, वहीं उसके बाद अभी तक 15 के लगभग फिर से नोटिस जारी कर दिए गए है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रूपये की भूमि वक्फ बोर्ड की है, पर इसका कब्जा ट्रस्ट के पास है। ट्रस्ट ने 16 फरवरी 1988 को कब्जा लिया था। बोर्ड ने 15 ¨सतबर 2017 को इसका एग्रीमेंट हर¨पदर ¨सह पुत्र स¨वदर ¨सह पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर के नाम पर कर दिया। विवाद के हर¨पदर ने स्टे के लिए कोर्ट में अप्लाई किया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। बाक्स..

तब से लेकर अब तक मात्र पत्र व्यवहार

मन्ना ने कहा कि अलाटमेंट के बाद ट्रस्ट 27 नवंबर 2017 को वक्फ बोर्ड को लिखता है कि यह अलाटमेंट नियमों के खिलाफ की गई है। इसका कब्जा ट्रस्ट के पास है, इसलिए अलाटमेंट रदद की जाए, लेकिन बोर्ड इसे रद्द नहीं किया। क्षेत्र की एसोसिएश ने 31 दिसंबर 2017 को पत्र अलग अलग अधिकारियों को लिखकर बताया कि यहां गैर कानूनी निर्माण हाउ¨सग लेन में किया जा रहा है। ट्रस्ट ने 20 नंवबर 2017 को बिजली बोर्ड को अवैध निर्माण को बिजली कनेक्शन नहीं देने को पत्र लिखा, पर कोई एक्शन नहीं हुआ। 22 नवंबर 2017 को ट्रस्ट ने पुलिस कमिश्नर को लिखा कि अवैध निर्माण हो रहा है, इसे रोका जाए और इस पर कार्रवाई के लिए पुलिस फोर्स दी जाए। पर कुछ नहीं हुआ। पुलिस सहायता के लिए 28 नवंबर 2017 को एक और पत्र भेजा गया, ट्रस्ट 6 दिसंबर 2017 को इसी पत्र का हवाला देते हुए अन्य दोबारा पत्र लिखा जिसमें बताया कि हमारे कर्मी अवैध निर्माण तोड़ने गए। जिन पर दूसरी पार्टी ने हमला कर दिया इसलिए आरेापी पक्ष पर एफआईआर दर्ज की जाए, लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। बाक्स...

एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

मन्ना ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि 9 जनवरी 2018 को ट्रस्ट ने पत्र भेजकर कहा कि उसने यह संपत्ति निगम को ट्रांसफर कर दी है। इसलिए निगम इस अवैध कब्जे और निर्माण को रोके। इसी दिन एक पत्र निगम के टाउन प्ला¨नग विभाग को भी निर्माण बंद करवाने को भेजा गया। इस दिन ट्रस्ट अधिकारी अपनी चमड़ी बचाने के लिए एक रिपोर्ट तैयार कर भेजते है कि उनकी ओर से कई बार संबंधित विभागों को पत्र कार्रवाई के लिए लिखे गए, पर किसी विभाग ने सहयोग नहीं दिया। विडंबना तो यह रही कि 18 दिसंबर 2017 को एक एडीसीपी ट्रस्ट को पत्र भेजता है कि मामले के संबंध में सारे दस्तावेज लेकर 20 दिसंबर 2017 को उनके पास आ जाए। विभाग का जेई शमशेर ¨सह रिकार्ड लेकर जाता है। पर एडीसीपी कार्यालय में मिलता ही नहीं। विभाग एडीसीपी से दोबारा टाइम मांगता है फिर भी पुलिस टाइम आज तक नहीं देती। 22 मार्च 2018 को निगम के अधिकारी अपनी चमड़ी बचाने के लिए ट्रस्ट को पत्र लिखते है कि भूमि की मालिकी ट्रस्ट की है इसलिए कब्जा व अवैध निर्माण पर वह कार्रवाई करे।

कोट्स...

कार्रवाई के लिए ड्यूटी मैजिस्टेट तैनात : सेखड़ी

ट्रस्ट अपनी जगह का कब्जा लेने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसे लेकर कार्रवाई भी की गई है। पुलिस से फोर्स मांगी गई है। डिप्टी कमिश्नर की ओर से ड्यूटी मजिस्टेट तैनात कर दिया गया है। जल्द ही इस बाबत कार्रवाई की जाएगी।

—राजीव सेखड़ी, एसई नगर सुधार ट्रस्ट।

Posted By: Jagran