जागरण संवाददाता, अमृतसर: पंजाब सरकार के एजुकेशन सेक्रेटरी के चुनाव ड्यूटी संबंधी आदेशों के बाद अध्यापकों ने राहत की सांस ली है। अब अध्यापक वर्ग को बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ बीएलओज के रूप में चुनावी ड्यूटी नहीं करनी होगी। उक्त आदेशों के बाद जिला प्रशासन अध्यापकों की जगह अन्य सरकारी कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी पर लगाने के लिए सर्वे शुरु करवाने वाला है, ताकि शैक्षणिक स्टाफ की जगह नान टीचिग स्टाफ के अलावा अलग-अलग विभागों से कर्मचारियों को लगाया जा सके। जिला में चुनावी ड्यूटी में अगर 12 हजार स्टाफ तैनात रहता है तो इनमें कम से कम पांच हजार अध्यापक होते हैं।

बीएलओज के जिम्मे होता है बहुत काम

नया वोटर कार्ड बनवाना हो या वोटर कार्ड के शोध का काम हो, इसमें बीएलओ को घर-घर जाकर डाटा इकट्ठा करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें पूरा समय इसे देना पड़ता है। क्योंकि आजकल वोटें बनाने और वोटों की शोध का काम आनलाइन होता है तो बीएलओज को खुद को पूरी तरह से सोशल मीडिया से रू-ब-रू होना पड़ता है। कई बार अध्यापक इसमें अपडेट नहीं होते तो उनके साथ सोशल मीडिया और अलग-अलग तरह की साइट्स को ऑपरेट करने संबंधी कर्मचारी को लगाना पड़ता है। कई बार एंड्रायड फोन की जरुरत नहीं होने पर भी उन्हें एंड्रायड फोन लेना पड़ता है।

संगठन उठाते रहे हैं शुरू से ही यह मुद्दा

शिक्षा से जुड़े अलग-अलग संगठन शुरू से ही यह मुद्दा उठाते रहें हैं कि अध्यापकों के चुनावी ड्यूटी में व्यस्त होने के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके चलते ही सरकारी स्कूलों के नतीजे बुरे आने पर जब अध्यापक वर्ग को जिम्मेवार ठहराया जाता, तो वे इसके लिए बच्चों को पढ़ाने में दिया जाने वाला समय चुनावी ड्यूटी में निकलने की बात कहते हैं। कई बार चुनावी ड्यूटी परीक्षाओं के आसपास आ जाती है तो ऐसे में इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।

नान टीचिग स्टाफ पर नहीं ऐतराज

डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के प्रधान अश्विनी अवस्थी कहते हैं कि वे शुरू से ही शैक्षणिक स्टाफ को चुनावी ड्यूटी पर लगाए जाने के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने इस बाबत कई बार सरकार को ज्ञापन भी दिए। उन्होंने कहा कि टीचिंग स्टाफ को हटा कर उनकी जगह पर नोन टीचिग स्टाफ को चुनावी ड्यूटी पर लगाया जाए। देर से ही सही सरकार एक अच्छा फैसला लेने जा रही है। इसका साकारात्मक असर बच्चों की पढ़ाई पर दिखेगा। सरकार के आदेश होंगे लागू

चुनाव ड्यूटी, फ्लड ड्यूटी और वार ड्यूटी सबसे पहले होती है। वैसे चुनावों के दौरान स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो, इसका खास ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि स्कूल का समय खत्म होने के बाद ही अध्यापकों को इस काम के लिए भेजा जाता है। अगर अध्यापक वर्ग को इसमें राहत संबंधी सरकार आदेश देती है तो उन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा।

- सलविदर सिंह समरा, जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) अमृतसर। रविदर शर्मा

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!