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पंजाब में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा! लुधियाना में 35 और अमृतसर में संख्या पहुंची 25, विशेषज्ञों ने बताए लक्षण

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:00 AM (IST)

पंजाब में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। जालंधर और मोगा में दो मौतें हो चुकी है। लुधियाना में ...और पढ़ें

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. पंजाब में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

  2. लुधियाना में 35, अमृतसर में 25 और जालंधर में 13 मामले।

  3. विशेषज्ञों ने स्वाइन फ्लू के लक्षण और बचाव के तरीके बताए।

जागरण संवाददाता, पंजाबी टीम। पंजाब में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ता जा रहा है। अलग-अलग जिलों से सामने आए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रखी है। जालंधर में 85 वर्षीय बुजुर्ग की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है, इसके अलावा मोगा में भी एक मरीज की मौत का मामला सामने आ चुका है। जालंधर जिले में एक मौत के साथ 13 मरीज संक्रमित मिल चुके हैं।

लुधियाना में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां अब तक 35 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। हालांकि आधे से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं और जिले में अभी तक किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। अमृतसर में साल की शुरुआत से अब तक 25 मामले सामने आए हैं, जिनमें पांच मरीज अभी सक्रिय हैं।

मालवा क्षेत्र में मोगा में छह, फरीदकोट में तीन तथा बठिंडा और फाजिल्का में दो-दो संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं फिरोजपुर, श्री मुक्तसर साहिब, फतेहगढ़ साहिब, कपूरथला, मानसा, गुरदासपुर, तरनतारन, बरनाला और होशियारपुर में फिलहाल कोई सक्रिय मामला नहीं है।

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जिला कुल पॉजिटिव केस एक्टिव केस रिकवर केस
लुधियाना 35 17 18
अमृतसर 25 5 20
जालंधर 13 12 0
मोगा 6 - -
फरीदकोट 3 1 2
फाजिल्का 2 0 2
बठिंडा 2 0 2

अस्पतालों में तैयारियों पर भी सवाल

मामलों के बीच अस्पतालों की तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कपूरथला और गुरदासपुर के सिविल अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए तकनीकी कर्मचारी नहीं हैं। अमृतसर में 20 में से चार वेंटिलेटर खराब बताए गए हैं।

राहत की बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में टेमीफ्लू की गोलियों और सिरप का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। अस्पतालों में अलग वार्ड बनाकर मरीजों की निगरानी की जा रही है।

निगेटिव रिपोर्ट के बावजूद हो सकते हैं लक्षण

विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह के अनुसार, स्वाइन फ्लू की जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बावजूद मरीज में फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं। संक्रमण की शुरुआत में वायरस की मात्रा कम होने, नमूना सही समय या तरीके से न लिए जाने पर जांच निगेटिव आ सकती है।

बुखार, गले में खराश, खांसी और जुकाम के पीछे सामान्य फ्लू, आरएसवी, डेंगू या मलेरिया भी हो सकता है। इसलिए लक्षण होने पर चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।

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स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण

  • अचानक तेज़ बुखार: ठंड लगने के साथ सिरदर्द और तेज बुखार आना।

  • सांस संबंधी समस्याएं: लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी, गले में खराश और सांस फूलना।

  • शरीर और मांसपेशियों में दर्द: पूरे शरीर में भारीपन, जोड़ों में दर्द और अत्यधिक थकान महसूस होना।

  • पाचन संबंधी लक्षण: कुछ मामलों में उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन होना।

  • नाक से जुड़ी समस्याएं: नाक बहना या नाक बंद होना।

बचाव और सावधानी के उपाय

  • हाथों की स्वच्छता: दिन में कई बार साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं, या जीवाणुनाशक घोल का उपयोग करें।

  • मुखौटे का प्रयोग: भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मुखौटा पहनें और खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या कोहनी से ढकें।

  • चेहरे को न छुएं: बिना हाथ धोए अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें।

  • सामाजिक दूरी: बीमारी के लक्षण वाले व्यक्तियों से सुरक्षित दूरी बनाएं। यदि आप स्वयं बीमार महसूस कर रहे हैं, तो घर पर रहें।

  • वार्षिक टीकाकरण: चिकित्सक की सलाह से फ्लू का टीका लगवाएं, जो इस विषाणु से सुरक्षा प्रदान करता है।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता और आहार: पर्याप्त पानी पिएं, पौष्टिक भोजन लें और पूरी नींद लें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।

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