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बेअदबी कानून संशोधन पर पंजाब सरकार का बड़ा कदम, श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपा 25 पन्नों का मसौदा

Published: Wed, 29 Jul 2026 02:11 PM (IST)

पंजाब सरकार ने बेअदबी कानून संशोधन का 25 पन्नों का मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपा है।

बेअदबी कानून संशोधन का 25 पन्नों का मसौदा श्री अकाल तख्त को सौंपा (फोटो: जागरण)

बेअदबी कानून संशोधन का 25 पन्नों का मसौदा श्री अकाल तख्त को सौंपा (फोटो: जागरण)

HighLights

  1. पंजाब सरकार ने बेअदबी कानून का मसौदा अकाल तख्त को सौंपा।

  2. पांच सिंह साहिबान मसौदे की समीक्षा कर निर्णय लेंगे।

  3. अकाल तख्त ने मानसून सत्र में विधेयक पेश न करने की सलाह दी।

जागरण संवाददाता, अमृतसर। बेअदबी कानून में संशोधन को लेकर चल रहे विवाद के बीच पंजाब सरकार ने बुधवार को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में संशोधित कानून का 25 पन्नों का मसौदा और उठाई गई आपत्तियों के जवाब आधिकारिक रूप से सौंप दिए।

सरकार की ओर से आम आदमी पार्टी के विधायक डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर और अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने यह दस्तावेज सचिवालय के प्रभारी को सौंपे। गौरतलब है कि श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बेअदबी कानून में मौजूद आपत्तिजनक प्रावधानों और शब्दावली में संशोधन के लिए पंजाब सरकार को एक महीने का समय दिया था।

बुधवार को इस अवधि का अंतिम दिन था, जिसके ठीक पहले सरकार ने अपना संशोधित मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब को सौंप दिया। दस्तावेज सौंपने के बाद विधायक डा. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि पंजाब सरकार ने उन्हें संशोधित मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी।

सरकार ने अपना पक्ष आधिकारिक रूप से रख दिया है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या सिख समुदाय की सभी आपत्तियों का समाधान मसौदे में कर दिया गया है, तो उन्होंने इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कहा कि अब आगे का निर्णय श्री अकाल तख्त साहिब को करना है।

वहीं श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से प्रतिनिधि जसकरण सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा सौंपे गए मसौदे का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। यह मामला पूरे खालसा पंथ की भावनाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर पांच सिंह साहिबानों की आगामी बैठक में गंभीरता से विचार किया जाएगा। बैठक में मसौदे की समीक्षा के बाद ही श्री अकाल तख्त साहिब अपनी आधिकारिक राय पंजाब सरकार को देगा।

जसकरण सिंह ने कहा कि सरकार को मसौदा तैयार करने से पहले श्री अकाल तख्त साहिब से औपचारिक चर्चा करनी चाहिए थी। उनका सुझाव है कि विद्वानों और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाए, ताकि आपसी सहमति से ऐसा कानून तैयार हो सके जो सिख भावनाओं के अनुरूप होने के साथ-साथ सभी पक्षों को स्वीकार्य हो।

इस बीच श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार को यह भी सलाह दी है कि 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में संशोधित बेअदबी विधेयक तब तक पेश न किया जाए, जब तक श्री अकाल तख्त साहिब इसकी समीक्षा पूरी कर अपनी राय सरकार को नहीं दे देता। इससे स्पष्ट संकेत मिला है कि धार्मिक संस्था पहले मसौदे की हर धारा की जांच करना चाहती है।

अब इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें पांच सिंह साहिबानों की होने वाली बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में मसौदे पर विस्तृत चर्चा होगी और उसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें और निर्णय से अवगत कराएगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि संशोधित बेअदबी कानून विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा या उसमें और बदलाव किए जाएंगे।