नितिन धीमान, अमृतसर : सिविल अस्पताल में स्थित जन औषधि केंद्र से रेडक्रास को फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी। पंजाब हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन (पीएचएससी) ने स्पष्ट किया है कि जन औषधि केंद्र न नफा, न नुकसान के सिद्धांत पर चलता है। ऐसे में किसी को इसमें हिस्सेदारी नहीं दी जा सकी। कारपोरेशन के इस पत्र के बाद 12 माह से बंद जन औषधि केंद्र का ताला खुलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

दरअसल, वर्ष 2008 में खुला यह देश का पहला जन औषधि केंद्र है। मरीजों को वाजिब दाम पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध करवाने के मकसद से स्थापित किए गए इस केंद्र का संचालन रेडक्रास सोसायटी करती थी, लेकिन जुलाई 2021 में जन औषधि केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों पर ब्रांडेड दवाएं रखने व बेचने का आरोप लगा। उस समय सिविल अस्पताल के एसएमओ डा. चंद्रमोहन ने शौचालय में रखीं ब्रांडेड दवाएं बरामद कीं और प्रशासन को इस विषय में जानकारी दी। इसके पश्चात जिला प्रशासन ने कर्मचारियों को हटाकर केंद्र में ताला लगवा दिया था। एक वर्ष से इस पर अनिश्चितता का ताला लटका है। हालांकि प्रशासन ने जन औषधि का संचालन रेडक्रास के बजाय सिविल अस्पताल की रोगी कल्याण समिति के हवाले कर दिया है, पर रेडक्रास ने अभी तक केंद्र की सुपुर्ददारी नहीं दी है। सुपुर्ददारी से अभिप्राय यह है कि रेडक्रास लिखकर देगा कि जन औषधि का संचालन छोड़ रहा है।

तकरीबन एक दशक तक जन औषधि का संचालन करने वाला रेडक्रास हिस्से की मांग कर रहा है। जून माह में रेडक्रास ने सिविल अस्पताल प्रशासन को पत्र लिख कहा था कि वह जन औषधि की सुपुर्ददारी देने को तैयार है, बशर्ते उन्हें दवाओं के विक्रय से होने वाली आय का 40 फीसद हिस्सा चाहिए। अस्पताल प्रशासन ने यह पत्र पंजाब हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन को भेजा। कारपोरेशन ने प्रत्युत्तर में कहा कि जन औषधि केंद्र की आय से रेडक्रास को पैसा नहीं मिलेगा। यह कमाई नहीं, सेवा का काम है। रोगी कल्याण समिति अब शीघ्रातिशीघ्र इस केंद्र को कार्यान्वित करने की दिशा में काम करें। पंजाब हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन का आदेश मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने रेडक्रास को सूचित किया है और उससे पुन: सुपुर्ददारी मांगी है।

जल्द खोलेंगे जन औषधि केंद्र : डा. राजू चौहान

सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. राजू चौहान के अनुसार हम जल्द ही जन औषधि खोलने की दिशा में काम कर रहे हैं। नए स्टाफ की नियुक्ति करने के लिए एसडीएम-टू से बात की थी। एसडीएम ने इसके लिए सहायक सिविल सर्जन, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व एक अनौपचारिक व्यक्ति की टीम बनाई है। यह टीम स्टाफ की तैनाती करेगी। हम प्रयास कर रहे हैं कि एक माह के भीतर ही यह सारा काम संपन्न हो जाए।

जन औषधि केंद्र खोलने में कई बार आ चुकी है बाधा

वास्तविक स्थिति यह है कि जन औषधि केंद्र खोलने में बार-बार सरकारी अड़चनें बाधा बनती रही हैं। हालांकि दैनिक जागरण ने लगातार समाचार प्रकाशित किए, जिस वजह से स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन केंद्र को खोलने की कवायद में जुटा है।

Edited By: Jagran