जागरण संवाददाता, अमृतसर

श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश पर्व एसजीपीसी की ओर से संगत के सहयोग से पूर्ण श्रद्धा व धार्मिक मर्यादा के अनुसार मनाया गया। इस मौके पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संपादन स्थल गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से पुरातन रीति अनुसार आलौकिक नगर कीर्तन निकाला गया। इसमें बढ़ी संख्या में संगत शामिल हुई। रामसर साहिब में आसा की वार के बाद नगर कीर्तन की शुरूआत के अवसर पर भाई सुलतान ¨सह की ओर से अरदास की गई। जबकि श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार ¨सह ने पावन हुक्मनामा लिया। नगर कीर्तन के दौरान ज्ञानी जगातर ¨सह ने अपने सिर पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पावन स्वरूप ले जा कर पालकी साहिब में सुशोभित किया। नगर कीर्तन के दौरान ज्ञानी जगतार ¨सह चौर साहिब की भी सेवा निभाई। नगर कीर्तन की शुरूआत के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन ¨सह भी विशेष रूप में शामिल हुए।

परंपरा के अनुसार नगर कीर्तन बाबा साहिब चौंक से होते हुए श्री हरिमंदिर साहिब में जा कर समाप्त हुआ। नगर कीर्तन में गतका पार्टियां, स्कूल कॉलेजों के विद्यार्थी, सिख सभा सोसायटियों के सदस्य व बैंड पार्टियां भी बड़ी संख्या में शामिल हुई। सारे रास्ते को संगत की ओर से विशेष रूप में सजाया गया था। जगह जगह पर शबील व खान पान की अन्य वस्तुओं के लंगर की व्यवस्था की गई थी। श्री हरिमंदिर साहिब , श्री अकाल तख्त साहिब व बाबा अटल राय साहिब में आलौकिक जलौ सजाए गए। हरिमंदिर साहिब परिसर को सुंदर फूलों के साथ सजाया गया वहीं दीपमाला भी की गई।

नगर कीर्तन के अवसर पर संगत को संबोधित करते हुए हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार ¨सह ने पहले प्रकाश पर्व की संगत को बधाई दी। वहीं इस महान नगर कीर्तन के इतिहास के संबंध में भी संगत को जानकारी दी गई। बताया कि पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी की ओर से वर्ष 1604 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संपादन के बाद बाबा बुड्ढा जी और सिख संगत के साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप इस स्थान से ले जाकर श्री हरिमंदिर साहिब में प्रकाश किया गया था। इस परंपरा के अनुसार ही हर वर्ष यह विशाल नगर कीर्तन आयोजित किया जाता है। उन्होंने संगत को गुरबाणी के अनुसार जीवन जीने का आह्वान किया। इस अवसर पर एसजीपीसी के पदाधिकारी भगवंत ¨सह सियालका, र¨जदर ¨सह मेहता, हरजाप ¨सह , बलदेव ¨सह, मुख्य सचिव डा रूप ¨सह, मंजीत ¨सह बाठ, दिलजीत ¨सह बेदी, बल¨वदर ¨सह जौडा¨सघा, म¨हदर ¨सह आहली, जगजीत ¨सह जग्गी, जस¨वदर ¨सह दीनपुर, सुखदेव ¨सह भूराकोहना, प्रताप ¨सह , विजय ¨सह , सतनात ¨सह , गुरप्रताप ¨सह , जगतार ¨सह , र¨जदर ¨सह रूबी आदि भी मौजूद थे।

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