वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने जीएनडीयू में नावलकार नानक सिंह की काव्य पुस्तक का किया विमोचन, कहा-

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जागरण संवाददाता, अमृतसर

गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के गुरु ग्रंथ साहिब भवन में सोमवार को नावलकार नानक सिंह की काव्य पुस्तक 'खूनी वैसाखी' का पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने विमोचन किया। यह पुस्तक 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में हुए दुखांत पर आधारित है। इस पुस्तक को 1920 के बाद अब दोबारा से प्रकाशित कर रिलीज किया गया है।

इस दौरान वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि यह पुस्तक आंखों देखी दास्तां की प्रतीक है। जिसे कवि ने बहुत ही मार्मिक ढंग से पेश किया है। इसके लिए सभी पंजाबी उनके अहसानमंद रहेंगे। उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम आज प्रण लें कि देश में से अनपढ़ता, फिरकाप्रस्ती और भष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए सांझे तौर पर कदम से कदम मिला कर चलेंगे। आज भी देश के शहीदों का सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा जिसके लिए उन्होंने अपनी जानें कुर्बान की थी। सभी लोग सुख-शांति की अरदास करते हुए कहा कि देश की तरक्की के लिए खुद को आगे लेकर आएं। 'खूनी वैसाखी' काव्य पुस्तक का जिक्र करते हए कहा कि इसमें नावलकार नानक सिंह ने उन जज्बातों और भावनाओं को पेश किया है जो देशभक्तों में थीं। आज भी हमें मनुष्यवादी सोच पर पहरा देने के लिए प्रेरित करती है। इस कविता से आने वाली पीढि़या को अवगत करवाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग में शहीदों ने अपना खून देकर जो सांझी वार्ता का संदेश दिया उसे भूलना नहीं चाहिए। जो अपना इतिहास भूल जाते हैं, उनका भविष्य भी खत्म हो जाता है। जलियांवाला बाग की कुर्बानियों को जहां सदियों तक याद रखा जाएगा वहीं मानवता की हत्या के लिए अंग्रेज सरकार को गलत नीति को भी नकारा जाता रहेगा ।

उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ को पहले विश्व युद्ध से नहीं बल्कि 1857 के गदर से भी समझना चाहिए। इस दौरान डॉ. अमनदीप कौर ने 'खूनी वैसाखी' में पेश किए गए हालात और ब्यौरे को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जिस समय वह कविता लिख रहे थे उस समय रोल्ट एक्ट लागू था। कविता देश के लोगों की चीखें बनकर उभरी है। अंग्रेजों ने पहले विश्व युद्ध के बाद लोगों में सांझे तौर पर बन रही आजादी की लड़ाई से घबरा कर रोल्ट एक्ट लाया था। अमृतसर के उस समय के हालात को उन्होंने जिस तरह से पेश किया है कि इतिहास के विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक दस्तावेज से कम नहीं है। पुस्तक का अनुवाद करने वाले नवदीप सूरी ने कहा कि उन्होंने कविता की खूबसूरती को बरकरार रखने की पूरी कोशिश की है। इस दौरान जीएनडीयू के वीसी डॉ.जसपाल सिंह संधू ने नावलकार नानक सिंह और गुरबख्श सिंह प्रीत लड़ी के परिवार के सदस्यों के अलावा पहुंचे अन्य लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस बात पर गर्व महसूस हो रहा है कि आज जीएनडीयू में इस किताब को आजादी के कई साल बाद रिलीज किया गया है, जिसको अंग्रेजो ने बैन कर दिया था। इस मौके पर रजिस्ट्रार डॉ. करणजीत सिंह काहलों, डीन डॉ.हरदीप सिंह, डॉ. नरपिदर सिंह, गुनबीर सिंह और अन्य मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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