जागरण संवाददाता, अमृतसर: अदालत के आदेशों के बावजूद सरकार व प्रशासन की ओर से पराली जलाने वाले किसानों को मौके पर जुर्माने करने के हुए फैसले खिलाफ किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने आंदोलन शुरू करने का एलान किया है। संघर्ष कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जो भी सरकारी अधिकारी किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए गांवों में आएगा किसान उसका घेराव करेंगे। यह आंदोलन राज्य भर में चलाया जाएगा। इस संबंधी फैसला किसान मजदूर संघर्ष कमेटी की कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया है।

संघर्ष कमेटी की बैठक के बाद कमेटी के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने बताया कि किसानों को एफआइआर का डर दिखा कर उनको पराली जलाने से रोकने वाले अधिकारी पहले पराली खपाने का विकल्प किसानों को दें। इसके बाद ही पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ प्रशासन कोई कार्रवाई कर सकता है। अगर बिना कोई ठोस विकल्प दिए अधिकारी गांवों में किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए आते है तो किसान उन अधिकारियों का घेराव करेंगे।

पन्नू ने कहा कि केंद्र व पंजाब सरकारें धान की पराली को जलाने से रोकने के लिए किसानों पर जुर्माने लगाकर और एफआइआर दर्ज करती आ रही है। परंतु किसानों को पराली को संभलने के लिए कोई भी ठोस व सस्ता विकल्प उपलब्ध नहीं करवा रही है। राज्य में हर वर्ष दो करोड़ टन से अधिक पराली धान की फसल से पैदा होती है। इस संबंधी सरकार की ओर से जो वायदे किसानों के साथ पिछले वर्ष किया था उनको लागू भी नहीं किया जा रहा है। सरकार ने एलान किया था कि दो एकड़ भूमि के मालिक किसानों को निशुल्क मशीनरी और औजार दिए जाएंगे। पांच एकड़ तक पांच हजार रूपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि के मालिक किसानों को 15 हजार रूपये के औजार व मशनीरी दी जाएगी। मशीनरी पर भी जो 50 प्रतिशत दिखावे वाली सबसिडी दी जा रही है उसे पर भी कट लगा दिया गया है। पंजाब व केंद्र सरकारें किसानों को धान के प्रति क्विटल पर 200 रूपये बोनस दे या फिर 6000 रूपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दे। वहीं, पराली को उपयोग में लाने के लिए राज्य में उद्योग स्थापित करे। सरकार अपने सारे वायदों से भाग रही है।

Posted By: Jagran

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