नितिन धीमान, अमृतसर

कई परीक्षणों के बाद आई जीवनदायी और बहुमूल्य कोरोना वैक्सीन खराब हो रही है। स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से वैक्सीन लगवाने के प्रति उत्साह नहीं दिखाने की वजह से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। यही वजह है कि कोरोना वैक्सीन की 39 डोज तीन दिन में खराब हुई हैं।

दरअसल, वैक्सीन की वायल एक बार खोलने के बाद यह चार घंटे तक प्रभावी रहती है। इसके बाद यह असर नहीं करती और फिर वैक्सीन को लगाया नहीं जा सकता। सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्सीन की एक वायल में दस डोज हैं। प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी को 0.5 की डोज लगाई जाती है। अफसोस यह है कि स्वास्थ्य कर्मी वैक्सीन लगवाने की उतना उत्साह नहीं दिखा रहे जितना अपेक्षित है।

19202 स्वास्थ्य कर्मियों को लगाई जानी है वैक्सीन

अमृतसर में 19202 स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन लगाई जानी है। जिस कछुआ चाल से स्वास्थ्य कर्मी टीका लगवाने आ रहे हैं, उससे तो यह लक्ष्य बीस दिन में भी पूरा नहीं हो पाएगा। इसके बाद फ्रंट लाइन वारियर्स का टीकाकरण किया जाना है, फिर पचास साल से अधिक आयु के लोगों का। स्वास्थ्य कर्मियों की जिद की वजह से टीकाकरण अभियान को सरअंजाम तक पहुंचाने में विलम्ब हो रहा है। अमृतसर में पिछले तीन दिन में 351 स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण हुआ है, जबकि लक्ष्य 900 का था। यह महज 39 फीसद ही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार कर रहे अपील

स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी, डाक्टर लगातार स्टाफ को टीका लगवाकर यह संदेश दे रहे हैं कि वे टीकाकरण करवाएं, पर अभी भी हेल्थ वर्करों में चिंता है। इससे वायल तो खराब हुई ही, वहीं टीकाकरण अभियान पर भी व्यावधान खड़ा हो रहा है। अमृतसर में 20880 डोज आई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआत में ही यह गाइडलाइन जारी कर दी थी कि दस फीसद तक वैक्सीन खराब हो जाए तो कोई बात नहीं, इससे अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे हो सकता है समाधान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, वैक्सीन की वायल तब खोली जाए जब एक साथ दस स्वास्थ्य कर्मी टीका लगवाने के लिए आएं। दोपहर तीन बजे के बाद तीनों स्वास्थ्य केंद्रों में से किसी एक में वैक्सीन खोली जाए। यह वैक्सीन बच जाए तो इसे दूसरे स्वास्थ्य केंद्र में भेजा जाए। इससे वैक्सीन के खराब होने का खतरा नहीं रहेगा।

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