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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 16, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सावधान! मिठाई में हैं हानिकारक केमिकल्स, एेसे परखें शुद्धता

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Mon, 16 Oct 2017 12:35 PM (IST)Updated: Tue, 17 Oct 2017 09:07 AM (IST)

दीपावली पर मिठाई की बिक्री बढ़ जाती है, लेकिन मिठाइयों में मिलावट जमकर हो रही है। मिलावट के जहर से मिठाइयां जहरीली होने लगी हैं।

सावधान! मिठाई में हैं हानिकारक केमिकल्स, एेसे परखें शुद्धता
सावधान! मिठाई में हैं हानिकारक केमिकल्स, एेसे परखें शुद्धता

जेएनएन, अमृतसर। आज से दो दशक पहले त्योहारों के सीजन में गली-मोहल्लों की नुक्कड़ पर हलवाइयों को बड़ी-बड़ी कढ़ाइयों पर मिठाइयां तैयार करते देखा जाता जा सकता था। शुद्ध देसी घी व वनस्पति घी से तैयार इन मिठाइयों को देखकर मुंह में पानी भर आता था। ग्राहकों के सामने ही हलवाई मिठाइयां तैयार करते और यह हाथों हाथ बिक भी जातीं। निसंदेह, इन मिठाइयों में मिलावट का आवरण लगभग न के बराबर था।

समय बदला और छोटे हलवाइयों का कारोबार बड़ा हो गया। गली की नुक्कड़ से कढ़ाई गायब हो गई और बड़े-बड़े मिष्ठान भंडारों में रंग-बिरंगी मिठाइयां सजने लगीं। मुनाफाखोरी की चाह ने इन मिठाइयों को कड़वा नहीं जहरीला भी कर दिया। मिलावट का गोरखधंधा तेजी से फलने फूलने लगा।

त्योहारों की बात छोड़िए, हमारे समाज में हर उत्सव मिठाई के बगैर अधूरा माना जाता है। यह जानकर ताज्जुब होगा कि मिठाइयां खिलाकर खुशियां बांट रहे लोग खुद भी धीमा जहर खा रहे हैं और अपने संगी-साथियों को भी खिला रहे हैं। वर्तमान दौर में मिठाइयां तैयार करने में कई हानिकारक केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है। हर साल की तरह दीपावली से पूर्व बाजारों में मिष्ठान भंडार सज चुके हैं। बड़े पैमाने पर बाजार में मिलावटी खोये से तैयार होने वाली मिठाइयां बिकने लगी हैं।

इन मिठाइयों को बनाने में सिंथेटिक दूध या दूषित खोये का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उदाहरण लोहगढ़ स्थित खोया मंडी में सहज ही देखने को मिलता है। यहां कई बार स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापामारी कर सैकड़ों किलोग्राम दूषित खोया पकड़ा। आम व्यक्ति इसे पहचान नहीं सकता कि यह नकली है या असली। दूषित खोये में कास्टिक सोडा और यूरिया मिला होता है।

यूरिया कीटनाशक है, इससे कीट मर जाते हैं तो मानव शरीर पर कितना दुष्प्रभाव होगा। यह प्रत्यक्ष रूप से फेफड़ों को क्षति पहुंचाता है। सिविल अस्पताल के मेडिसिन डॉक्टर मनिंदर सिंह का कहना है कि मिठाइयां दिखने में आकर्षक लगे, इसलिए इन्हें तरह तरह के रंगों से सजाया जाता है। ये सस्ते रंग शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव छोड़ते हैं। मिठाई में प्रयुक्त होने वाला घटिया क्वॉलिटी का तेल या घी भी हानिकारक है।

इसी प्रकार सिंथेटिक दूध में तेल मिलाया जाता है। झाग के लिए यूरिया और कॉस्टिक सोडा का इस्तमाल किया जाता है। इस दूध से तैयार मिठाई का सेवन करने से फूड पाइप में अल्सर पैदा होता है और गुदरें को भी नुकसान पहुंचता है। डॉ. मनिंदर सिंह के अनुसार दीपावली पर मिलावट का खेल इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि हमारे देश में पर्व और त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। अधिक जनसंख्या होने के कारण मिठाइयों की मांग भी बढ़ जाती है।

एक्ट का पालन नहीं करते दुकानदार

शहर के ज्यादातर दुकानदारों के पास फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस नहीं है। बिना लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन के मिठाइयां बेचने वालों पर जुर्माना और जेल का प्रावधान है, पर स्वास्थ्य विभाग ने जिले में आज तक एक भी ऐसा केस रजिस्टर्ड नहीं किया। हालांकि स्थानीय स्तर पर दुकानदारों को कई बार चेतावनी जरूर दी गई है।

ऐसे परखें मिठाई की शुद्धता

मिलावटी खोये से तैयार मिठाई में अजीब सी गंध आती है। इसे सूंघकर नहीं पहचाना जा सकता। खाने पर यह हल्की सी कसैली और गंधयुक्त लगती हैं। मिठाइयों का रंग देखकर भी मिलावट के बारे में पता लगा सकते हैं। मिठाई की सुंदरता को चार चांद लगाने वाला चांदी का वर्क हाथ पर रगड़ें। यह गायब हो जाएगा। यदि यह वर्क एल्युमिनियम का है, तब वह खत्म नहीं होगा।

बिक जाएगी मिठाई, फिर आएगी रिपोर्ट

यह जानकर हैरानी होगी कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दीपावली से पूर्व विभिन्न मिष्ठान भंडार में भरे गए सैंपलों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है। यानी कि यह रिपोर्ट दीपावली से पहले नहीं आ पाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि रिपोर्ट आने तक दूषित मिठाइयां बिक जाएंगी लोगों तक पहुंच जाएंगी।

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