जागरण संवाददाता, अमृतसर : जलियांवाला बाग मेमोरियल सिविल अस्पताल में स्थित जन औषधि केंद्र में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। इस केंद्र का स्टाफ मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहा है। मरीजों को दवा देने के बाद बिल नहीं दिया जाता। यहां तक कि दस रुपये की दवा का पत्ता तीस रुपये में बेचा जा रहा है। वीरवार को एडीसी हिमांशु अग्रवाल ने जन औषधि केंद्र में अचानक दबिश दी। उन्होंने सेल परचेज रिकॉर्ड चेक किया। कर्मचारियों से पूछा कि मरीजों को बिल क्यों नहीं देते। इस पर स्टाफ को जवाब देते नहीं बना।

दरअसल, वर्ष 2008 में सिविल अस्पताल में स्थापित किया गया यह केंद्र देश का पहला जन औषधि केंद्र है। इस केंद्र की स्थापना मरीजों को वाजिब दाम पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध करवाने के मकसद से की गई थी। केंद्र में तीन फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। आरोप है कि ये फार्मासिस्ट अपनी ड्यूटी ईमानदारी से नहीं करते, वहीं मरीजों के साथ दु‌र्व्यवहार भी करते हैं। नियमानुसार दवा देने के बाद संबंधित व्यक्ति को इसका बिल देना अनिवार्य है, पर जन औषधि केंद्र का स्टाफ अपनी जेब भरने के लिए न तो लिए देता है और न ही बकाया राशि। इस बात की शिकायत मिलने पर डिप्टी कमिश्नर शिवदुलार सिंह ढिल्लों ने वीरवार को एडीसी हिमांशु अग्रवाल को इस केंद्र की जांच पड़ताल करने भेजा। डॉ. हिमांशु ने पाया कि मरीजों को दवाओं के बिल नहीं दिए जाते। उन्होंने दवा खरीदने आए लोगों से भी बातचीत की। इसके अलावा यह भी देखा कि जन औषधि केंद्र में जेनरिक दवाएं ही बेची जा रही हैं, क्योंकि ऐसा संभावित था कि जन औषधि का स्टाफ एलोपैथी दवाएं न बेच रहे हों।

केंद्र में कंप्यूटर ऑपरेटर व अकाउंट स्टाफ भी नहीं मिला

हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि वह शाम तकरीबन चार बजे जन औषधि केंद्र में पहुंचे थे। उस वक्त केंद्र में न तो कंप्यूटर ऑपरेटर था और न ही अकाउंट विभाग का कोई कर्मचारी। केंद्र में मरीजों को बिल नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने जन औषधि केंद्र के इंचार्ज सचिन को शुक्रवार को अपने कार्यालय में आकर रिकॉर्ड दिखाने को कहा है।

उधर, सिविल में रेडक्रॉस के जन औषधि केंद्र की भी शिकायत

स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. प्रभदीप कौर जौहल ने डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखा है कि रेडक्रॉस द्वारा सिविल अस्पताल में संचालित की जा रहे जन औषधि केंद्र में भी भारी अनियमितताएं हैं। इस संबंध में केंद्र के इंचार्ज को कई बार नोटिस जारी किया गया है, लेकिन वह जवाब नहीं देता। उन्होंने स्टाफ को अपने पास बुलाकर कई बार समझाया कि अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाए, पर उन पर कोई असर नहीं। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर से आग्रह किया है कि रेडक्रॉस द्वारा संचालित की जा रही जनऔषधि को रोगी कल्याण समिति के हवाले कर दें ताकि सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल अधिकारी जन औषधि का कामकाज देख सकें।

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Posted By: Jagran

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