जागरण संवाददाता, अमृतसर

पंजाब में नशे का जहर इतना फैल चुका है कि लोगों को नशा मुक्त करने के नाम पर जगह-जगह नशा मुक्ति केंद्र खुल गए हैं। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसे नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ किया है जो सरकारी परमीशन के बगैर चल रहा था। यहां दाखिल नशेड़ियों को इलाज के नाम पर डंडों से पीटा जाता था। दवा के नाम पर वह गोली दी जाती थी जिससे वे मदहोश हो जाते थे। स्वास्थ्य विभाग ने नशा मुक्ति केंद्र से आठ नशेड़ियों को मुक्त करवाया है। इन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र में एडमिट करवाया गया है।

दरअसल, मानांवाला के समीप स्थित गांव राजोवाल में चल रहे 'एक परिवर्तन' नामक नशा मुक्ति केंद्र में इन युवाओं को अवैध तौर पर रखा गया था। नशा मुक्ति संचालकों के पास लाइसेंस नहीं था। इस बात की सूचना मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई ने बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे सहायक सिविल सर्जन डॉ. किरणदीप कौर को दल-बल के साथ यहां भेजा। केंद्र के बड़े हॉल में आठ युवाओं रखा गया था। अंदर गंदगी फैली थी। मक्खियां भिनभिना रही थी। टीम को देखकर नशा मुक्ति केंद्र का एक पार्टनर विक्रम वहां से फरार हो गया। इसके बाद टीम ने सभी आठ नशेड़ियों को केंद्र से बाहर निकाला और सेंटर सील कर दिया। इन नशेड़ियों में सभी 25 से 30 आयु वर्ग के युवा हैं।

दोपहर बारह बजे सभी नशेड़ियों को सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित नशा मुक्ति केंद्र में पहुंचाया गया। नशेड़ियों ने खुलासा किया कि एक परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र में उन्हें डंडों से पीटा जाता था। केंद्र के संचालक व कर्मचारी खुद नशे का सेवन करके उन्हें पीटते थे। एक युवक ने बताया कि हर रोज उन्हें सिर्फ चावल दिए जाते थे, जिसे वह पानी पीकर निगलते थे। एक रोज उसने रोटी मांगी तो उसे रात डेढ़ बजे कस्सी के डंडे से पीटा गया। उसकी कमर व पैर पर गंभीर चोटें आईं। मुझे तड़पता हुआ छोड़कर वे चले गए। आज एक महीना हो गया जख्म नहीं भरा। उन्होंने मुझे दवा तक नहीं दी। इसी तरह दो अन्य नशेड़ियों ने भी अपने शरीर के जख्म दिखाते हुए कहा कि हमें वहां सिर्फ शारीरिक प्रताड़ना मिलती रही। नशा मुक्ति केंद्र के कर्मचारी नशीली गोलियां व अफीम खाते थे, चिट्टे का सेवन भी करते थे। नशा करके हमें बुरी तरह पीटते। इस छापामारी में सहायक सिविल सर्जन के साथ सीएचसी मानांवाला के एसएमओ डॉ निर्मल ¨सह, सिविल अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. ईशा धवन व डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर अमरदीप ¨सह भी शामिल थे। नशेड़ियों को जबरन घर से उठा ले जाते थे केंद्र के कर्मचारी

इस अवैध नशा मुक्ति केंद्र तक युवाओं को पहुंचाने के लिए संचालक पहले उनके अभिभावकों से संपर्क करते थे। अभिभावकों से कहा जाता था कि उनका बच्चा सुरक्षित रहेगा और दो-तीन महीनों में नशा छोड़ भी देगा। इसके बाद नशा मुक्ति केंद्र के कर्मचारी नशेड़ी के घर आकर उसे जबरन उठाकर ले जाते थे। अभिभावकों से प्रतिमाह दस हजार रुपये लिए जाते। अपने लिए खाना बनवाते, कपड़े भी धुलवाते

युवाओं ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के संचालक व कर्मचारी हमसे अपने लिए खाना बनवाते। अपने कपड़े, यहां तक कि अंडर गारमेंट भी हमसे ही धुलवाते। नानुकुर करने पर गालियां निकाली जातीं और पीटा जाता। हमारे घर से जो सामान आता था वह कर्मचारी खुद ही रख लेते। 2012 में खुला था एक परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र

यह अवैध नशा मुक्ति केंद्र वर्ष 2012 में खुला था। छह सालों तक इस केंद्र के संचालक नशेड़ियों को दाखिल कर प्रताड़ित करते रहे। सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई ने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र के संचालक सुख¨वदर ¨सह लूथरा व विक्रम ¨सह हैं। इन दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। नशेड़ियों को देते थे सीपीएम दवा

केंद्र में नशेड़ियों को सीपीएम दवा दी जाती थी। यह दवा खुजली रोग होने पर मरीज को दी जाती है। इसके सेवन से इंसान नींद में चला जाता है। नशेड़ियों को यह दवा खिलाकर नशा मुक्ति केंद्र संचालक मदहोश कर देते थे। खास बात यह है कि दो नशेड़ियों ने नशा मुक्ति केंद्र से भागने का प्रयास भी किया, पर कर्मचारियों ने इन्हें पकड़कर इतना पीटा कि फिर उन्होंने कभी ऐसा करने की हिम्मत नहीं की। नशेड़ियों का होगा निशुल्क इलाज

स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र में पहुंचे सिविल सर्जन डॉ. हरदीप ¨सह घई ने कहा कि सभी नशेड़ियों का निशुल्क इलाज होगा। उन्होंने नशेड़ियों से कहा कि उन्हें मालूम होना चाहिए कि सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में फ्री इलाज होता है। यहां उन्हें दवा और खाना मिलेगा। नशा छूटने के बाद रीहैब्लिटेशन सेंटर में हाथ का हुनर भी सिखाया जाएगा। नशे से तौबा करो और परिवार का सहारा बनो।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!